पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति में 5 मुंह किसके होते हैं? हर मुख का अलग है रहस्य

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पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति में 5 मुंह किसके होते हैं? हर मुख का अलग है रहस्य

⭕हिंदू धर्म में हनुमान जी को सबसे पूजनीय देवताओं में से एक माना जाता है और उन्हीं का एक स्वरूप ‘पंचमुखी’ हनुमान जी के नाम से जाना जाता है।

आपने अक्सर इन्हें मंदिर या घर में पूजन के दौरान मूर्ति रूप में देखा होगा।

इनके अलग-अलग पांच मुंह दिखाई देते हैं जो भक्तों के लिए रक्षा कवच की भांति काम करते हैं।

ये हनुमान जी के वो पांच अलग-अलग रूप माने जाते हैं जिन्हें वो अपने भक्तों की अलग-अलग दिशाओं से रक्षा करने के लिए धारण करते हैं। उनके हर चेहरे का एक खास मतलब होता है। आइए आपको बताते हैं पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति में मौजूद अलग-अलग मुखों के रहस्य और इनका क्या महत्व है।

क्यों लिया था हनुमान जी ने पंचमुखी
पंचमुखी हनुमान रामायण काल के सबसे प्रसिद्ध स्वरूपों में से एक माने जाते हैं। भगवान राम और लक्ष्मण को बचाने के लिए हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया था। जब लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया, तो रावण ने युद्ध जीतने के लिए अपने एक भाई ‘अहिरावण’ की मदद ली। वह पाताल लोक का राजा था। अहिरावण को भगवान ब्रह्मा से यह वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु तभी होगी जब कोई एक साथ पांच दिशाओं में जल रहे दीपों को बुझा देगा।

विभीषण अहिरावण के बारे में अच्छी तरह जानते थे। उन्होंने राम जी को इसके बारे में बताया। अहिरावण ने कई बार हमला करने की कोशिश की लेकिन असफल रहा। आखिरकार, उसने विभीषण का रूप धारण किया और सोते हुए भगवान राम और लक्ष्मण के कक्ष में प्रवेश किया। अहिरावण सोते हुए राम और लक्ष्मण को उठाकर पाताल लोक ले गया।

उस समय प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी की खोज में हनुमान जी पाताल लोक गए। हनुमान जी अहिरावण के वरदान के बारे में अच्छी तरह जानते थे। उसका वध करने के लिए उन्होंने पंचमुखी रूप धारण किया। अपने पांच मुखों से उन्होंने एक साथ सभी दिशाओं में जल रही अग्नि को बुझा दिया। इस प्रकार, अहिरावण के नांत के लिए हनुमान जी के पंचमुखी रूप का जन्म हुआ।

📿पंचमुखी मूर्ति में हनुमान जी के अलग-अलग मुख कौन से हैं?
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•हनुमान जी की पंचमुखी मूर्ति में अलग-अलग रूप हैं जो विभिन्न देवताओं की ऊर्जा का प्रतीक हैं। आइए जानें 5 मुख कौन से हैं और उनका महत्व क्या है?

हयग्रीव

हनुमान जी का यह रूप ऊपर की दिशा की ओर है। हयग्रीव ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रतीक माने जाते हैं। अपने भक्तों के बीच वे अपनी बुद्धि और ज्ञान के लिए जाने जाते हैं।

इस रूप की पूजा करने से आध्यात्मिक ज्ञान, स्पष्टता और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। यह मुख पंचमुखी प्रतिमा में ऊपर की तरफ होता है।

हनुमान

पूर्व की ओर मुख वाले हनुमान जी साहस और शक्ति के प्रतीक हैं। हनुमान जी के इसी रूप की सबसे अधिक पूजा की जाती है। मुख्य रूप से, यह भगवान राम के प्रति हनुमान जी की भक्ति को दिखाता है।

पूर्व मुखी हनुमान की पूजा करने वालों को साहस और आत्मविश्वास मिलता है और उन्हें किसी भी बड़े नुकसान से सुरक्षा मिलती है।

गरुड़

पंचमुखी हनुमान में पश्चिम की ओर मुख वाला रूप गरुड़ का है। गरुड़ को भगवान विष्णु का वाहन माना जाता है। पंचमुखी हनुमान का यह रूप स्वतंत्रता और मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। गरुड़मुखी हनुमान जी आस-पास मौजूद हानिकारक ऊर्जाओं से भक्तों की सुरक्षा करने का प्रतीक हैं। क्योंकि गरुड़ का संबंध गति और शक्ति से है, इसलिए इस रूप की पूजा करने से भक्तों को जीवन की समस्याओं से जल्दी छुटकारा मिलता है।

वराह

वराह मुख भगवान विष्णु के वराह अवतार का प्रतीक है, जो संतुलन, सुरक्षा और स्थिरता को दिखाता है। वराह हनुमान की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर रखने और लोगों की भौतिक व आध्यात्मिक संपत्ति की रक्षा करने में सक्षम हैं। यह लोगों को अपने लक्ष्यों को पाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए जमीन से जुड़े रहने और ध्यान केंद्रित करने के लिए भी प्रेरित करता है।

नरसिंह

दक्षिण मुखी पंचमुखी हनुमान नरसिंह का स्वरूप हैं, जो भगवान विष्णु का आधा मानव और आधा शेर वाला अवतार हैं। हनुमान जी का यह रूप बुराई से सुरक्षा और डर के विनाश का प्रतीक है। माना जाता है कि नरसिंह की उग्र और शक्तिशाली उपस्थिति भक्त के जीवन से बाधाओं को दूर करती है और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा करती है।

पंचमुखी हनुमान जी के अलग-अलग मुख अलग भगवानों का प्रतीक हैं और इनकी एक साथ पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलने के साथ बल और साहस भी बढ़ता है।

नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान

ज्योशैलेन्द्र सिंगला पलवल हरियाणा mo no/WhatsApp no9992776726

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