राधे – राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥
17 – 09 – 2026
||श्री बलदेव छठ की मंगल बधाई ||
शेष अर्थात सिर्फ शेषनाग नहीं अपितु जगत से पहले और जगत प्रलय के बाद भी जो सत्ता विद्यमान रहती है, प्रत्येक काल में जिस सत्ता का अस्तित्व रहता है, भगवान की वही शक्ति ” शेष” कहलाती है। ब्रज के राजा श्री दाऊ दयाल जी महाराज को विभिन्न नामों से जाना जाता है। माँ देवकी के गर्भ से इनको खींचकर यानि कर्षण कर माँ रोहणी के गर्भ में प्रतिस्थापित किया गया इसलिए इनको “संकर्षण” भी कहा जाता है। बल की अधिकता के कारण भी इनको बलराम कहा जाता है।
जो बल गौ- ब्राह्मण को कष्ट देने में, परस्पर द्वेष में, दूसरों के अहित में, धर्म की उपेक्षा में, अन्याय में , अत्याचार में , दुष्कृत्यों में और अधर्म में प्रयोग किया जाता है, वही अभिमान है और जो बल गौ-ब्राह्मणों की सेवा में, परस्पर मैत्रीभाव में, समाज के उत्थान में, सत्संगति में, दीनजनों की सेवा में, परोपकार में, परमार्थ में, परहित में और सतत धर्म में प्रयोग किया जाता है, बस वही बल ही तो बलराम है।
ब्रज के राजा श्री दाऊ दयाल जी महाराज के पावन प्राकट्य उत्सव की आप सभी को अनंत शुभकामनाएं एवं मंगल बधाई।















