वक़्त धीरे धीरे सब कुछ सिखा देता है

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वक़्त धीरे धीरे सब कुछ सिखा देता है, सब्र भी, सुकून भी और मुस्कुराना भी। दान और दया का मतलब अंधाधुंध बाँटना नहीं है, और ऐसे दान धर्मदान से समाज का भला हुआ भी नहीं है। शांत रहो, इंतजार करो, सही पात्र खुद हमें मिलेंगे, जिन्हें सच में हमारे साथ और सहारे की जरूरत है,

उनको चुनो-उनका हाथ थामना और पकड़े रहना ताकि एक परिवार की या एक पूरी पीढ़ी की जिंदगी समाज की समांतर धारा में आ जाए।