एक चीज़ जो रोज घट रही है,वो है आयु एक चीज़ जो रोज बढ़ रही है,वो है तृष्णा एक चीज़ जो सदा एक सी रहती है,वो है “विधि का विधान” जिंदगी सिर्फ अपने लिए जीना नहीं होता बल्कि परिवार की जिम्मेदारियां निभाना भी जरूरी होता है हर इंसान के जीवन में एक समय आता है,जब उसे कई जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ती है जिम्मेदारियां बोझ नहीं होती,ये मजबूत बनाती है बच्चों का भविष्य,माता-पिता की देखभाल और खुद का जीवन संतुलन,इन सबको संभालना ही असली समझदारी है इसलिए अपनी प्राथमिकता तय कर और संतुलन बना कर ही चलना चाहिए जो जिम्मेदारियों से भागता नहीं,वही जिंदगी में सफल होता है व्यक्ति की सोच अगर दूषित है तो,वह सोच हर क्षण उसकी आत्महत्या करती है उसका हर क्षण चिंता,तनाव,अवसाद अर्थात डिप्रेशन को जन्म देती है इसलिए स्वास्थ्य के लिए हमें हर क्षण अपनी सोच और विचारों को मूल्य देना चाहिए बेगुनाह कोई नहीं,राज सबके होते है,किसी के छुप जाते है,किसी के छप जाते है
जीवन के चार सबसे बड़े सत्य अनुभव से बड़ा कोई गुरु नहीं,संतोष से बड़ा कोई बैंक बैलेंस नहीं,कर्म से पक्का कोई बही खाता नहीं,स्वास्थ्य से कीमती को आभूषण नहीं अहंकार के वृक्ष पर केवल विनाश का फल आता है स्वामी विवेकानंद जी कहते है,जिंदगी की हर एक ठोकर ने एक ही सबक सिखाया है,रास्ता कैसा भी हो भरोसा सिर्फ अपने कदमों पर रखे एक कहावत “दुखों से कौन अछूता है,सबको जीवन ने लूटा है खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले परिस्थिति को देखकर लें दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो अक्सर दुखीः ही रहते दूसरे से मदद लेने के बजाय आप उनके मददगार बन जाए,फिर देखे स्वयं भगवान आपकी मदद के लिए खड़े होंगे।
भवतु सब्ब मंगलम्
















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