जीवन में सबसे कठिन काम पहाड़ चढ़ना नहीं है, भारी वजन उठाना नहीं है, दिन-रात मेहनत करना भी नहीं है। सबसे कठिन काम है खुद को नियंत्रित करना। इंसान बाहर की दुनिया को जीतने की कोशिश करता है, लेकिन असली लड़ाई उसके भीतर चल रही होती है। जो व्यक्ति अपने मन, इच्छाओं, आदतों और भावनाओं पर नियंत्रण कर लेता है, उसके लिए सफलता की राह अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।
हर व्यक्ति जानता है कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। फिर भी वह अक्सर वही करता है जो उसके लिए नुकसानदायक होता है। सुबह जल्दी उठना चाहिए, लेकिन नींद जीत जाती है। व्यायाम करना चाहिए, लेकिन आलस हावी हो जाता है। गुस्सा नहीं करना चाहिए, फिर भी क्रोध पर नियंत्रण नहीं रह पाता। यही कारण है कि आत्मनियंत्रण को सबसे बड़ी शक्ति कहा गया है।
मन हमेशा आसान रास्ता चुनना चाहता है। वह आराम चाहता है, त्वरित सुख चाहता है और मेहनत से बचना चाहता है। दूसरी ओर सफलता, स्वास्थ्य, धन और सम्मान उन लोगों को मिलते हैं जो अपने मन की हर बात नहीं मानते। वे जानते हैं कि हर इच्छा को पूरा करना जरूरी नहीं है। कई बार मन को रोकना, टालना और अनुशासित करना ही आगे बढ़ने का रास्ता होता है।
आत्मनियंत्रण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह व्यक्ति को परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनने देता। जब लोग आलोचना करते हैं, तब नियंत्रित व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता। जब असफलता मिलती है, तब वह टूटता नहीं है। जब सफलता मिलती है, तब वह अहंकार में नहीं बहता है। उसका संतुलन बना रहता है। यही संतुलन उसे दूसरों से अलग बनाता है।
आज के समय में आत्मनियंत्रण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। मोबाइल, सोशल मीडिया, मनोरंजन और अनगिनत आकर्षण हर समय हमारा ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। कुछ मिनट देखने के लिए खोला गया फोन कई बार घंटों का समय खा जाता है। ऐसे वातावरण में जो व्यक्ति अपने समय और ध्यान को नियंत्रित कर सकता है, वही वास्तव में आगे निकलता है।
आत्मनियंत्रण का अर्थ इच्छाओं को खत्म करना नहीं है। इसका अर्थ है इच्छाओं का मालिक बनना, उनका गुलाम नहीं। भूख लगने पर खाना स्वाभाविक है, लेकिन आवश्यकता से अधिक खाना नियंत्रण की कमी है। क्रोध आना सामान्य है, लेकिन क्रोध में गलत निर्णय लेना कमजोरी है। पैसा कमाने की इच्छा अच्छी है, लेकिन लालच में नैतिकता खो देना नियंत्रण का अभाव है।
इतिहास और वर्तमान दोनों इस बात के गवाह हैं कि महान उपलब्धियां उन्हीं लोगों ने हासिल की हैं जिन्होंने अपने ऊपर विजय प्राप्त की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अनुशासन बनाए रखा। उन्होंने तत्काल सुख की बजाय दीर्घकालिक सफलता को चुना। जब दूसरे लोग बहाने बना रहे थे, तब वे अपने लक्ष्य पर टिके रहे।
खुद को नियंत्रित करना एक दिन का काम नहीं है। यह रोज की जाने वाली साधना है। छोटी-छोटी आदतों से इसकी शुरुआत होती है। समय पर उठना, नियमित व्यायाम करना, अनावश्यक खर्च रोकना, सोच-समझकर बोलना, गुस्से में निर्णय न लेना और लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना आत्मनियंत्रण के ही रूप हैं। हर दिन किया गया छोटा प्रयास धीरे-धीरे व्यक्ति के चरित्र को मजबूत बनाता है।
जिस दिन इंसान अपने मन से यह कहने की क्षमता विकसित कर लेता है कि मैं वही करूंगा जो मेरे लिए सही है, न कि जो इस समय आसान या आकर्षक लग रहा है, उसी दिन उसकी वास्तविक प्रगति शुरू हो जाती है। दुनिया को जीतने से पहले स्वयं को जीतना आवश्यक है। जो स्वयं पर शासन करना सीख लेता है, उसके लिए जीवन की अधिकांश चुनौतियां छोटी पड़ जाती हैं।
















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