मृत्युदंड का ऑर्डर = आखिरी शब्द नहीं होता। दुनिया में हजारों केस हैं जहाँ फाँसी से 1 दिन पहले मुक्ति मिली।
इवाओ हाकामदा – Iwao Hakamada
रोज पूछते थे “आज गोली मारोगे?”
अंत मे मुक्ति मिला
बोला: “मौत ने मुझे छुआ, पर ले नहीं गई। शायद देश के काम आना बाकी था”।
नाम: इवाओ हाकामदा – Iwao Hakamada
“कर्म का खाता ऊपर वाला रखता है”
जज ने फाँसी लिख दी, पर कर्म में मौत नहीं लिखी तो कोई न कोई बहाना बन जाता है – DNA, माफी, जंग।
भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं।
हाकामदा 46 साल “नमु अमिदा बुत्सु” जपता रहा। 89 में आजाद।
इवाओ हाकामाडा (Iwao Hakamada) का मामला जापानी न्याय प्रणाली के इतिहास में सबसे चर्चित गलत सजा (Wrongful Conviction) का मामला है। वे दुनिया के सबसे लंबे समय तक मौत की सजा का इंतजार करने वाले कैदी थे।
मामले की मुख्य बातें:
आरोप: 1966 में शिज़ुओका प्रांत में एक मिज़ो (सोयाबीन पेस्ट) फैक्ट्री के मालिक, उनकी पत्नी और दो बच्चों की हत्या और घर में आग लगाने का आरोप लगाया गया था
गिरफ्तारी और सजा: हाकामाडा, जो एक पूर्व पेशेवर मुक्केबाज थे, को लगातार 12 घंटे की क्रूर पूछताछ के बाद एक जबरन कबूलनामा देने पर मजबूर किया गया। 1968 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
सबूतों में हेराफेरी: घटना के एक साल बाद, पुलिस ने एक मिज़ो टैंक में खून से सने कपड़े खोजे। दशकों बाद, अत्याधुनिक डीएनए परीक्षणों से साबित हुआ कि खून हाकामाडा का नहीं था और पुलिस ने सबूतों में हेराफेरी की थी।
रिहाई और बरी होना: 2014 में उन्हें एक नए ट्रायल (पुनर्विचार) की अनुमति के साथ रिहा कर दिया गया। आखिरकार, सितंबर 2024 में शिज़ुओका जिला न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से आधिकारिक रूप से बरी कर दिया।
मुआवजा: 46 वर्षों तक मौत की सजा की जेल में प्रताड़ित रहने के बाद, 2025 में अदालत ने उन्हें 217 मिलियन येन (लगभग 1.4 मिलियन डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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