सर्वं कठिनं स्यात्, तस्मात् धैर्यं धर ; जलमपि यथाकालं पाषाणं छेत्तुमर्हति_ नारद

अमृतवाणी तव, मम च मध्ये स्थिता भित्तिः (भेदः) केवलं शब्दस्य हि वर्तते । यदा स शब्दो निपतेत्, तदा केवलं प्रेम…

Read More
भगवान महादेव जैसा परमार्थी और वैरागी कोई दूसरा देव नहीं है_ विजय कुमार शुक्ला उत्तरप्रदेश

मंगल निधि महादेव भगवान महादेव जैसा परमार्थी और वैरागी कोई दूसरा देव नहीं है। भगवान शिव की करुणा तो देखिए,एक…

Read More
फलदार पेड़ और गुणवानव्यक्ति ही झुकते हैं,सुखा पेड़ और मूर्खव्यक्ति कभी नहीं झुकते,

फलदार पेड़ और गुणवानव्यक्ति ही झुकते हैं,सुखा पेड़ और मूर्खव्यक्ति कभी नहीं झुकते,कदर किरदार की होती है,वरना कद में तो…

Read More
कैसे हुई नागों की उत्पत्ति _मनीष चन्द्र पाण्डे अयोध्या उत्तरप्रदेश

नाग पंचमी ~~ कैसे हुई नागों की उत्पत्ति ? ~~~~~~हमारे धर्म ग्रंथो में शेषनाग, वासुकि नाग, तक्षक नाग, कर्कोटक नाग,…

Read More
भगवान विष्णु अपने ही दिव्य धाम को छोड़कर एक असुर राजा के द्वार पर प्रहरी बनकर क्यों खड़े हुए?

क्या आपने कभी सोचा है कि वैकुंठ के स्वामी, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु अपने ही दिव्य धाम को छोड़कर…

Read More

ॐ नमः शिवाय🕉️ जय-जय श्री महाकाल 🕉️ नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्‌ ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश…

Read More