मुक्ति भी मैं हूँ और बंधन भी मैं हूँ।जैसा हमारा चिंतन और संकल्प होते हैं, वैसे ही हम बन जाते हैं_कृपाशंकर.ऋषिकेश

ध्यान, समर्पण, कूटस्थ, महात्मा, वीतराग और स्थितप्रज्ञ – परमप्रेम सहित परमात्मा का निरंतर चिंतन ही “ध्यान” है, जिसमें हम अपने…

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आखिर क्या है भारतवर्ष का पौराणिक इतिहास, महाभारत के अनुसार भरत का साम्राज्य सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त था _मनीष चन्द्र पाण्डे अयोध्या

आखिर क्या है भारतवर्ष का पौराणिक इतिहास…!!! इतिहास की अनेकों घटनाओं का उल्लेख पुराणों में मिलता है। पुराण वास्तव में…

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प्रत्येक व्यक्ति के पास में बुद्धि है पर बुद्धि के गुनौ का विकास हर कोई नहीं कर सकता है ,,

बुद्धि के गुनौ का विकास करें, प्रत्येक व्यक्ति के पास में बुद्धि है पर बुद्धि के गुनौ का विकास हर…

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जीवन के उत्थान के लिए यदि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कोई बात है तो वो है हमारा संग ,सुसंग में रहें, सत्संग में रहें ||

|| सुसंग में रहें, सत्संग में रहें || यदि आज कुसंग रूपी विष का सेवन करते रहे एवं समय रहते…

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