जल के बिना न तो प्रकृति का संतुलन बना रह सकता है और न ही प्राणियों का अस्तित्व संभव है_श्री विजय शुक्ला उत्तरप्रदेश

जलं धारयति पृथिवीं, जलं पुष्णाति जीवनम्।जल संरक्षणं कुर्यात्, जलं रक्षतु सर्वदा॥ भावार्थ:यह श्लोक ‘जल’ के महत्व और उसके संरक्षण की…

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सीखने की कोई उम्र नहीं होती _आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया

सादर आमंत्रण सीखने की कोई उम्र नहीं होतीइस प्रेरक विचार को चरितार्थ करने तथा वरिष्ठ नागरिकों में संगीत एवं नृत्य…

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बारम्बार नासिका मार्ग से वायु को बाहर निकालने तथा यथाशक्ति बाहर रोके रखने के अभ्यास से भी चित्त शान्त और निर्मल होता है

योगदिवस विशेष *योगमार्ग के विघ्न * व्याधिस्त्यानसंशयप्रमादाऽऽलस्याऽविरतिभ्रान्तिदर्शनाऽलब्धभूमिकत्वाऽनवस्थितत्वानि चित्तविक्षेपास्तेऽन्तराया:।। 30।। चल चित्तवृत्तियों के सहवासी विघ्न नौ हैंशत्रु योगमार्ग के विक्षेप बतलाते…

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बद्रीनाथ धाम की कथा ॐत्र्यंबकम यजामहे सुगंधि पुष्टि वर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनान मृत्युर्य मुक्षिय मामृतात

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ईश्वर के नाम-जप और स्वरूप का चिन्तन करने से साधक के साधना-पथ के विघ्न दूर होते हैं और आत्मज्ञान का आगमन होता है_डा देवीसहाय पाण्डे अयोध्या

योगदिवस विशेष *साधना में ईश्वर तत्व का महत्व * ईश्वरप्रणिधानाद्वा।। 23।। ईश्वर भी योग के प्रयोग में सहायक हैसाधना में…

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वेदों की जप, तप, व्रत की मंत्रों की तथा मंत्र प्रदान करने वाले गुरु की निंदा करते है वे अन्धकूप नरक को प्राप्त होते है।

श्रीब्रह्मवैवर्त पुराण4 श्रीकृष्णजन्मखण्ड अध्याय -40 भूदेवान्ब्राह्मणाश्चैव स्वागुरुं च पतिव्रता:।पति भिक्षु ब्रह्मचारि श्रृष्टिबीजान्सुरांस्थता।।134शिवं सुराणां प्रवरं दुर्गां लक्ष्मीं सरस्वतींम।गीतां च तुलसीं गंगां…

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एक समय था ऋषि मुनि ने अपने तपोबल, योग, और ध्यान के माध्यम से अलौकिक और गूढ़ ज्ञान प्राप्त करते थे।

प्राचीन काल में ऋषि-मुनि अपने तपोबल, योग, और ध्यान के माध्यम से अलौकिक और गूढ़ ज्ञान प्राप्त करते थे। वे…

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कुछ बातें “समझाने” पर नहीं बल्की “खुद” पर”बीत”जाने पर ही “समझ” में आती हैं

कुछ बातें “समझाने” पर नहीं बल्की “खुद” पर”बीत”जाने पर ही “समझ” में आती हैं कर्म का न्याय निश्चित है बाकी…

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