कठोरता भी आवश्यक
कभी-कभी केवल विनम्रता धारण करने से ही धर्मरक्षा, आत्मरक्षा एवं स्वाभिमानरक्षा संभव नहीं हो पाती है इसलिए जीवन में कठोरता का भी अपना स्थान है। कभी-कभी जहाँ विनय काम नहीं आता वहाँ कठोरता काम कर जाती है।
आपकी विनम्रता से किसी का अहित हो रहा हो तो उस विनम्रता से वो कठोरता कई गुना अधिक अच्छी है, जिससे किसी का हित हो जाए।
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति।
सहज कृपन सन सुंदर नीति॥
सदा विनम्र रहो लेकिन जहाँ पर आपकी विनम्रता किसी श्रेष्ठ कार्य के साथ-साथ आपके व सामने वाले के हित में बाधक बन रही हो वहाँ पर थोड़ा कठोरता दिखाकर उस श्रेष्ठ कार्य की परिपूर्णता ही श्रेयस्कर हो जाती है।
परिवार का मुखिया नर्म न हो तो परिवार का जुड़ना कठिन है और परिवार का मुखिया सख्त न हो तो परिवार का जुड़े रहना भी मुश्किल ही है। इसलिए जोड़ने के लिए नर्म एवं जुड़े रहने के लिए कठोर बनना भी सीखें।
🙏 जय श्री राधे कृष्ण
















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