कभी कभी” इंसान,सच में “थक जाता” हैं…!खामोश “रहते रहते”,दर्द “सहते सहते”सब्र “करते करते”उम्मीदें रखते रखतेरिश्ते “निभाते निभाते”…!सफाईयां “देते देते”और, अपनों को “मनाते मनाते

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“व्यक्ति पर ध्यान केंद्रित करने की अपेक्षा व्यक्तित्व पर ध्यान दीजिये। अधिकांशतः सुंदर पुष्प में भी कीड़े पाये जाते हैं, एवं उपेक्षित पत्थरों में भी हीरे मिल जाते हैं। पानी कितना भी गन्दा क्यों न हो किन्तु आग बुझाने के काम तो आ ही जता है। स्मरण रहे.. व्यक्ति महत्वपूर्ण नही अपितु व्यक्तित्व महत्वपूर्ण है। “

जीवन में “स्वास्थ्य” सबसे
बड़ा,”उपहार” है।
“संतुष्टि” सबसे बड़ी”सम्पत्ति” है।
“मुस्कराहट” सबसे बड़ी “ताकत” है।
और
“वफादारी” सबसे अच्छा “रिश्ता” है।

“कभी कभी” इंसान,
सच में “थक जाता” हैं…!
खामोश “रहते रहते”,
दर्द “सहते सहते”
सब्र “करते करते”
उम्मीदें रखते रखते
रिश्ते “निभाते निभाते”…!
सफाईयां “देते देते”
और, अपनों को “मनाते मनाते

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