~।। चौपाई ।।~~~~~ सुनहू उमा ते लोगअभागी।हरि तजि होहिंबिषय अनुरागी। भावार्थ :- भगवान शिव जी माता पार्वती जी से कहते…
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~।। चौपाई ।।~~~~~ सुनहू उमा ते लोगअभागी।हरि तजि होहिंबिषय अनुरागी। भावार्थ :- भगवान शिव जी माता पार्वती जी से कहते…
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अतिथि… या प्रतीक्षा? “अतिथि” शब्द ही अपने भीतर एक सुंदर अर्थ समेटे हुए है—जिसकी तिथि निश्चित न हो, वही अतिथि…
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ଗାଈ ଚୋରି କରି ଅଭିଶାପ ପାଇଥିବା ଆଠ ଭାଇ ଓ ପୃଥିବୀକୁ ପୁଣି ଫେରି ଆସିଥିବା ଜଣେ ରାଜାଙ୍କ କାହାଣୀ କାହିଁକି ସ୍ୱର୍ଗ ଯାଇଥିବା ରାଜା ପୁଣି…
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।। जय भगवान श्रीसूर्यनारायण ।। सूर्य देव हर सुबह अपने रथ पर सवार होकर पूर्व दिशा से दिन का प्रकाश…
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विवेकी जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है विवेक केवल बौद्धिक चतुरता का नाम नहीं है। यह अन्तःकरण का परम् निर्मल भाव…
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श्रीमद्भगवद्गीता कर्मों को करने में राग न हो और छोड़ने में द्वेष न हो—इतनी झंझट क्यों की जाये? कर्मों का…
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अमृतवाणी तव, मम च मध्ये स्थिता भित्तिः (भेदः) केवलं शब्दस्य हि वर्तते । यदा स शब्दो निपतेत्, तदा केवलं प्रेम…
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हर हर महादेव सूर्य अर्घ्य का महत्व (अध्यात्म एवं सनातन धर्म) हम सभी जानते हैं कि सूर्य सारे ब्रह्मांड की…
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मंगल निधि महादेव भगवान महादेव जैसा परमार्थी और वैरागी कोई दूसरा देव नहीं है। भगवान शिव की करुणा तो देखिए,एक…
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फलदार पेड़ और गुणवानव्यक्ति ही झुकते हैं,सुखा पेड़ और मूर्खव्यक्ति कभी नहीं झुकते,कदर किरदार की होती है,वरना कद में तो…
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