एक बार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ कैलाश पर्वत पर थे। वहाँ उन्होंने एक छोटी सी चिड़िया (या तोता) को देखा। उसी समय वहां मृत्यु के देवता यमराज भी आए और उन्होंने उस चिड़िया को देखकर कुछ विचार किया।
गरुड़ की दया और प्रयास: गरुड़ समझ गए कि यमराज की नजरें इस चिड़िया पर हैं और इसका अंत निकट है। दयावश गरुड़ ने उस नन्हीं चिड़िया को अपने पंजों में उठाया और उसे हजारों किलोमीटर दूर एक घने जंगल या पहाड़ की सुरक्षित गुफा में छोड़ आए। गरुड़ को लगा कि उन्होंने उस चिड़िया की जान बचा ली है।
यमराज से बातचीत: गरुड़ जब वापस कैलाश लौटे, तो उनकी मुलाकात यमराज से हुई। गरुड़ ने मुस्कुराते हुए यमराज से पूछा कि वे उस चिड़िया को कैसे ले जाते जिसे वे दूर छोड़ आए हैं।
विधि का विधान: यमराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि उस चिड़िया की मृत्यु उसी दूर के जंगल में एक साँप (या तय समय और स्थान पर) द्वारा लिखी थी। यमराज खुद सोच रहे थे कि इतनी छोटी चिड़िया उड़कर इतने दूर कैसे पहुंचेगी, लेकिन गरुड़ खुद उसे वहां पहुंचा आए।
यह कहानी हमें सिखाती है कि जिसे जो मृत्यु या भाग्य में लिखा है, उसे कोई टाल नहीं सकता।















