प्रेम सदा माफ़ी माँगना पसंद करता है,और अहंकार सदा माफ़ी सुनना पसंद करता है.

Spread the love

हमारा यह मानव शरीर, गर्भ से लेकर मृत्युपर्यंत तक एक कष्ट यात्रा ही तो है, जिसमें नाना प्रकार के दुःखों को हम, किसी अनजान सुख की चाह में जीते रहते, लेकिन प्रभु की लीला भी बड़ी विचित्र है, जन्म और मृत्यु के मध्य, मोह का ऐसा पर्दा पड़ा रहता हमारे जीवन में कि अंतिम सांसों से पूर्व ये पर्दा कभी हटता ही नहीं… तुलसीदास जी ने भी लिखा है… जनमत मरत दुसह दु:ख होई…. फिर भी हम भविष्य की योजनाओं में अपना पूरा जीवन व्यर्थ कर देते और एक दिन खाली हाथ इस संसार से विदा ले लेते… यदि हम जीवन का इतना सा मर्म जान लें, कि सुख की चाह में ही नए दुःख का जन्म होता है, तो कदाचित इस भंवर जाल से बच कर दूसरों के दुःखों को दूर करने में ही आनंद का अनुभव करने लगें… आज अपने प्रभु से जीवन के सुख दुःख में समदर्शी होने की अलौकिक प्रार्थना के साथ…!

कुछ बोलने और तोड़ने में केवल एक पल लगता है जबकि बनाने और मनाने में पूरा जीवन लग जाता है।
प्रेम सदा माफ़ी माँगना पसंद करता है,
और
अहंकार सदा माफ़ी सुनना पसंद करता है..!

ज्यादा बोझ लेकर चलने
वाले अक्सर डूब जाते हैं,
फिर चाहे वह बोझ क्रोध
का हो, बदले का हो, या
अभिमान का।

किसी व्यक्ति के दिल मे जगह बना लेना
इंसान के जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी है
क्योंकि
यही एक जगह है जहां पैसो से घर नही बनते।
1, जो व्यक्ति ! दूसरों के सुख में! स्वयं सुख का/आनन्द का अनुभव करता है
तथा-
2, दूसरों के! दु:ख/कष्ट के समय में! दया/करुणा/सहायता/सहयोग का भाव रखता है
सही मायने में! वही व्यक्ति
मानवता का सच्चा पुजारी/ उपासक/आराधक है!
आइए! आज हमसब मिलकर अखिल ब्रह्मांड आरोग्य प्रदाता भगवान सूर्यदेव से प्रार्थना करें कि हमें! निश्छल, निष्काम भाव युक्त सद् बुद्धि प्रदानकराकर अनुगृहीत करावें!