भलाई व्यर्थ नहीं जाती
मनुष्य हमेशा अपने भाग्य को ही कोसता है जबकि वह यह जानता भी है कि भाग्य से भी ऊंचा उसका अपना कर्म है जो स्वयं उसके हाथो होता है खुशी के लिए काम करेगे ख़ुशी नहीं मिलेगी लेकिन खुश होकर काम करेगे तो ख़ुशी और सफलता दोनो ही मिलेगी पहले अपना ध्यान दे,बाद में दूसरों को ज्ञान दे,यही तो जीवन का सिद्धांत है जीवन को गंभीर नहीं बनाना है,यह एक खेल है,इसे खेले,महसूस करना और जीना है दोनों सुरतें यकीन की है कोई ईश्वर के लिए सब छोड़ देता है और कोई ईश्वर पर सब छोड़ देता है जन्म से ना तो कोई दोस्त पैदा होता है और ना ही दुश्मन,वह तो हमारे घमंड,ताकत या व्यवहार से बनते है लोग आपकी उस खूबी से जलते है जिसकी उनमें कमी होती है अपने को परिस्थितियों का गुलाम कभी न समझें आप स्वयं अपने भाग्य के विधाता है ज़िन्दगी न तो सुख है न ही दुख है न ग़म है और न ही खुशी है बस अपने अपने कर्मो का
हिसाब है ज़िंदगी चाहे आज आप कुछ न करें और एक अनिश्चित कल के लिए तैयार हो जाएं या आज आप अपने कल को बेहतर और उज्ज्वल बनाने के लिए कुछ अच्छा करें जिंदगी तब बेहतर होती है,जब हम खुश होते है लेकिन यकीं करे,जिंदगी तब बेहतरीन हो जाती है जब हमारी वजह से,सब खुश होते है अंधेरों को पीने का हौसला रख ऐ मुसाफिर,ख़ुद के भीतर जलती एक मशाल है आप हौसले ओर जिद किसी हाकिम से कम नही होते है हर तकलीफ में ताकत की दवा देते है भक्ति कभी ना छोड़िए चाहे निंदा करे संसार,भक्ति में ही है परम सुख यही है समस्त वेदों का सार जीवन में किसी के प्रति की गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है वह कब किस रूप में आपके पास लौटकर आएगी यह केवल ईश्वर ही जानते है!
भलाई व्यर्थ नहीं जाती//ईश्वर के पास हाथ फैला ने से तुरंत कुछ नहीं मिलेगा, मनुष्य हमेशा अपने भाग्य को ही कोसता है जबकि वह यह जानता भी है कि भाग्य से भी ऊंचा उसका अपना कर्म है जो स्वयं उसके हाथो होता है खुशी के लिए काम करेगे ख़ुशी नहीं मिलेगी लेकिन खुश होकर काम करेगे तो ख़ुशी और सफलता दोनो ही मिलेगी
















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