हमारे धर्मशास्त्रों में पाँच ऐसी महान नारियों का वर्णन है, जिनका प्रातःकाल स्मरण मात्र ही बड़े-बड़े पापों का नाश कर देता है और जीवन में सौभाग्य लाता है। ये हैं पंचकन्या।
प्रसिद्ध श्लोक……
अहल्या द्रौपदी कुन्ती तारा मन्दोदरी तथा।
पंचकन्या: स्मरेन्नित्यं महापातकनाशिनी:॥

ये देवियाँ विवाहित होकर भी अपनी अतुलनीय पवित्रता, धैर्य और धर्मपरायणता के कारण “चिर कुमारी” मानी जाती हैं। आइए, जानते हैं इनका परिचय:
- अहल्या: ऋषि गौतम की पत्नी और अद्भुत सौंदर्य की स्वामिनी। छल का शिकार होने पर भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अंततः भगवान राम के चरणों के स्पर्श से पत्थर से पुनः नारी बनीं। वे पवित्रता की मूरत हैं।
- द्रौपदी: महाभारत की मुख्य नायिका और पाँच पांडवों की पत्नी। अग्नि से जन्मी ‘याज्ञसेनी’ ने जीवन भर अन्याय का सामना किया, लेकिन उनका स्वाभिमान और भगवान कृष्ण पर अटूट विश्वास नारी शक्ति की मिसाल है।
- कुंती: पांडवों की माता और त्याग की प्रतिमूर्ति। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने पुत्रों को धर्म की राह पर चलाने के लिए सदैव प्रेरित किया। वे ममता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं।
- तारा: वानरराज बाली की पत्नी। वे अत्यंत बुद्धिमती और दूरदर्शी थीं। उन्होंने हमेशा बाली को सही सलाह दी और उनकी मृत्यु के बाद भी अपने विवेक से राज्य का हित सोचा। वे बुद्धि और विवेक की देवी हैं।
- मंदोदरी: रावण की पटरानी और एक महान शिवभक्त। लंका के अधर्म के वातावरण में रहकर भी उन्होंने हमेशा धर्म का पक्ष लिया और रावण को सीता माता को लौटाने की सलाह दी। वे सतीत्व और सद्गुणों की आदर्श हैं।
ये पंचकन्याएँ हमें सिखाती हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा पर अडिग रहना ही सच्ची शक्ति है। इनका स्मरण हमारे जीवन में सुख, शांति और पवित्रता लाता है।
















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