ମଦ ମହାତ୍ମ୍ୟ
ମଦ ଭାଟି ଖୋଲି ବସିଛି ମଧୁଆ ମଦୁଆ ଆସନ୍ତି ଛୁଟି। ମଦୁଆଙ୍କ ଭିଡ ହୁଏ ଧିରେ ଧିରେ ଜମିଯାଏ ମଦଖଟି।। ଯେଉଁ ମଦୁଆଟି ନଆସଇ ଯେବେ କପାଳ ତା ଯାଏ ଫାଟି। କେତେ କଟୁକଥା ଶୁଣେ ପରଦିନ ନଖୋଲଇ ତାର ପାଟି।।
ମଦୁଆଙ୍କୁ ଯେବେ ନିଶା ଲାଗିଯାଏ ମଧୁଆ ନିଅଇ ଲୁଟି। ଲୁଟି ନେଲାପରେ ମଦୁଆଙ୍କୁ ମଧୁ ତଡିଦିଏ ଗୋଟି ଗୋଟି।। ନିଶାଗ୍ରସ୍ତ ହୋଇ ମଦୁଆ ଫେରନ୍ତି ଛାତିରେ ହାତକୁ ପିଟି। ଛପନ ଇଞ୍ଚିଆ ଚଉଡା ଛାତିଟା ସତେ କିବା ଯିବ ଫାଟି।।
✍️ ସଞ୍ଜୟ ରଥ ଭୁବନେଶ୍ୱର
कौन कितना खुश है
अब देखो महंगाई दिल जित रहा है युवाओं के बेरोजगार दिल जीत रहा है और देखो किसान को कैसे रो रहा है किसानों के कमाईं कैसे निचे गिर रहा है
अब देखो बेटियों को पढ़ाई कैसे होते हैं बढाई भी कैसे होते सादि में क्या होती है सोना चांदी महंगाई कैसे आसमान छुते है घर कि लड़की अब काहां भाग जाते हैं बुजुर्ग कैसे देश में हर रोज़ रोते हैं वैसा कब होता था क्या नेता दिल् जित् जातें है ?
रोषोंई के ग्यास् काहां गुम् हो जाता है देश में जितने बाल बचें क्या कितने खुश है?
✍️ संजय रथ ,भुवनेश्वर ✍️ 🌝
















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