क्रोध के समय वाणी अगर मधुर है, तो जिंदगी में समस्या नहीं आएगी” — ये सिर्फ कहावत नहीं, जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है।
1. क्यों सही है ये बात?
- क्रोध: 2 मिनट का। पर उसमें बोला गया एक कड़वा शब्द रिश्तों को 20 साल पीछे ले जाता है
- मधुर वाणी: आग पर पानी का काम करती है। सामने वाला भी शांत हो जाता है
- महर्षि कर्वे को समाज ने गालियाँ दीं, बहिष्कार किया। पर उन्होंने कभी कड़वा जवाब नहीं दिया। काम से जवाब दिया। नतीजा — आज पूरी दुनिया उन्हें पूजती है
2. शास्त्र भी यही कहते हैं
- तुलसीदास जी: “तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर। वशीकरण इक मंत्र है, तज दे वचन कठोर॥”
- कबीर दास: “ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥”
3. जिंदगी में कैसे अपनाएं?
क्रोध आए तो 3 काम करना:
- 10 तक गिनना — मुँह से पहले दिमाग चलाना
- पानी पीना — गला ठंडा, वाणी ठंडी
- सवाल पूछना — “क्या मेरा ये एक वाक्य रिश्ता तोड़ देगा?” अगर हाँ, तो चुप रहना बेहतर

गुस्सा सबको आता है जी, पर राजा वो है जो गुस्से में भी अपनी जुबान का राजा रहे। मधुर बोलने वाले के दुश्मन भी कम हो जाते हैं, और दोस्त बढ़ जाते हैं। ऐसी सोच रहेगी तो जिंदगी में सचमुच 90% समस्या आएगी ही नहीं
















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