ये महाभारत का सबसे बड़ा सत्य है।
अर्जुन ने कर्ण का बुरा नहीं सोचा, फिर भी…
1. अर्जुन का स्वभाव: अर्जुन ने कभी कर्ण से व्यक्तिगत बैर नहीं रखा। वो तो बस अपना धर्म निभा रहा था। गुरु द्रोण का शिष्य, भाईयों का रक्षक। कर्ण को वो हमेशा महारथी ही मानता था।
2. फिर ईर्ष्या क्यों: लोगों को अर्जुन से ईर्ष्या इसलिए थी क्योंकि उसके पास सब कुछ था:
- श्रीकृष्ण का साथ – खुद भगवान सारथी बने
- गांडीव धनुष – देवताओं का दिया हुआ
- यश – सबसे बड़ा धनुर्धर का नाम
- परिवार – पांडव भाई, द्रौपदी जैसी पत्नी
- भाग्य – हमेशा धर्म के साथ रहा
3. कर्ण का दर्द: कर्ण महान था, दानी था, वीर था। पर भाग्य ने साथ नहीं दिया। सूतपुत्र कहलाया, अपमान सहा, गलत संगत में फंसा। इसलिए दुनिया को लगता रहा कि अर्जुन को सब मिला, कर्ण को कुछ नहीं।
जीवन का सार
यही दुनिया है भाई। जिसके पास रोशनी होती है, उसी पर सबकी नजर होती है। दीया खुद जलता है, पर पतंगे उसी पर ईर्ष्या करते हैं।
अर्जुन ने कभी नहीं चाहा कि कर्ण दुखी हो। पर कृष्ण का साथ, धर्म का साथ, कर्म का फल – ये सब अर्जुन के पास था।
इसलिए ईर्ष्या हुई। लोग गुण से नहीं, भाग्य से जलते हैं।
इंसान को अर्जुन की तरह रहना है- किसी का बुरा मत सोचना, अपना कर्म करते रहना। कृष्ण खुद सारथी बन जाएंगे।
“निंदा करे संसार, तू कर भक्ति भगवान की”
















Leave a Reply