जग दहकत बह तपत पवन जब
सर सम लगत लपट अस तन पर।
बरसत अनल जलत जल थल सब
उगलत अगन गगन छन छन पर।।
कल न परत, तलफत जन-जन अस
सकल जगत जस जरत अगन पर।
रहत नगन तन सबन जनन कर
श्रम जल तल-तल बहत वदन पर।।
डॉ देवीसहाय पाण्डेय 'दीप'
“नेकी कर दरिया में डाल” – यही तो हमारी संस्कृति सिखाती है।
गीता में भी कृष्ण यही कहते हैं: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
बस सही कर्म करते जाओ, फल सही समय पर अपने आप मिल जाता है।
जो बीज आज बोओगे, उसका पेड़ ईश्वर सही मौसम में ही उगाएगा। न एक दिन पहले, न एक दिन बाद।
सही रास्ता थोड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन वही टिकता है।
गलत रास्ता जल्दी मंजिल दिखाता है, पर वो मंजिल ज्यादा देर नहीं ठहरती। सही रास्ता धीमा है, पर जो मिलता है वो अपना होता है और सुकून देता है।
जैसा कहते हैं:
“सच्चाई पर चलो तो दुनिया साथ न दे, पर ईश्वर जरूर देता है।”
जब इरादा साफ हो, रास्ता अपने आप बन जाता है।
गलत लोग हर रास्ते पर मिलेंगे। फर्क बस इतना है कि हमें उनके साथ चलना है या नहीं।
सही रास्ते पर भी लालच देने वाले, भटकाने वाले, शॉर्टकट दिखाने वाले मिल ही जाते हैं। वो चमकते हैं, जल्दी काम होता दिखाते हैं। पर वो रास्ता अंत में गड्ढे में ले जाता है।
तुलसीदास जी कह गए हैं:
“संगति से गुण होत हैं, संगति से गुण जात”
यानी जिसके साथ चलोगे, वैसे ही बन जाओगे।
गलत इंसान मिले तो नमस्कार करके आगे बढ़ जाओ। न लड़ना है, न उनके जैसा बनना है। बस अपना रास्ता मत छोड़ना।
क्योंकि आखिर में हिसाब ईश्वर के दरबार में होता है, दुनिया के दरबार में नहीं।
















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