जमशेदजी नसरवानजी टाटा// 1868 में ₹21,000 की पूंजी से “ट्रेडिंग कंपनी” शुरू की।जमशेदजी का मानना था कि “देश का भला करना ही सच्चा व्यापार है

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जमशेदजी नसरवानजी टाटा (1839 – 1904)
“भारतीय उद्योग के जनक

जमशेदजी टाटा सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं थे। उन्होंने वो नींव रखी जिस पर आज का आधुनिक भारत खड़ा है।

1. शुरुआती जीवन और परिवार

  • जन्म: 3 मार्च 1839, गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में।
  • पिता: नसरवानजी टाटा, जो एक पुजारी परिवार से थे लेकिन व्यापार में आ गए।
  • शिक्षा: मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज से पढ़ाई। 20 साल की उम्र में ग्रेजुएट हो गए।

2. व्यापार की शुरुआत

  • 1858 में 21 साल की उम्र में पिता के साथ व्यापार में आए।
  • 1868 में ₹21,000 की पूंजी से “ट्रेडिंग कंपनी” शुरू की।
  • अफीम और कपास का व्यापार करके चीन, जापान, इंग्लैंड तक काम फैलाया।
  • 1869 में दिवालिया हो चुकी एलेक्जेंड्रा मिल खरीदकर उसका नाम “एम्प्रेस मिल” रखा। 2 साल में उसे फायदे में ला दिया।

3. जमशेदजी के 4 बड़े सपने

जमशेदजी का मानना था कि “देश का भला करना ही सच्चा व्यापार है”। उन्होंने 4 सपने देखे:
सपना क्या हुआ
1. लोहा-इस्पात कंपनी उनकी मौत के 3 साल बाद 1907 में TISCO बनी। आज का Tata Steel, जमशेदपुर में।
2. विश्वस्तरीय होटल 1903 में मुंबई में ताज महल पैलेस होटल खोला। कारण: एक बार उन्हें अंग्रेजों के होटल में “भारतीय” होने पर घुसने नहीं दिया गया।
3. विज्ञान संस्थान 1909 में बेंगलुरु में IISc – Indian Institute of Science बना। अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान दिया।
4. हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट 1910 में Tata Power शुरू हुई। मुंबई को बिजली देने वाली पहली कंपनी।
4. जमशेदपुर की कहानी

  • स्टील प्लांट के लिए उन्होंने बिहार के साकची गांव को चुना।
  • उनके बेटे दोराबजी टाटा ने शहर बसाया।
  • 1919 में साकची का नाम बदलकर जमशेदपुर रखा गया।
  • ये भारत का पहला प्लांड इंडस्ट्रियल शहर था, जिसमें मजदूरों के लिए घर, स्कूल, अस्पताल सब था।

5. मजदूरों के लिए सोच
जमशेदजी अपने समय से बहुत आगे थे:

  • 1886: एम्प्रेस मिल में पेंशन योजना शुरू की
  • 1895: दुर्घटना बीमा शुरू किया
  • 8 घंटे काम का नियम, जो तब दुनिया में कहीं नहीं था

6. अंतिम समय

  • 19 मई 1904 को जर्मनी के बैड नॉहाइम में उनका निधन हो गया।
  • मरते वक्त उन्होंने बेटों से कहा: “देश को सबसे आगे रखना”।

7. विरासत
आज Tata Group 100+ देशों में है। लेकिन जमशेदजी का सबसे बड़ा योगदान है उनकी सोच:
“जिस समुदाय में हम रहते हैं, उसको हमसे बेहतर होना चाहिए क्योंकि हम वहां हैं।”


जमशेदजी ने कहा था: “मैं व्यापारी नहीं, देश का सेवक हूं।”
और सच में, उन्होंने भारत को आधुनिक उद्योग, विज्ञान और शिक्षा तीनों दिए।

क्या तुम जानना चाहोगे कि टाटा ने IISc बनाने के लिए अंग्रेजों से कैसे लड़ाई लड़ी थी?
[19/05, 19:50] Meta AI: जमशेदजी टाटा की मृत्यु 19 मई 1904 को हुई थी।

1. कब और कहाँ

  • तारीख: 19 मई 1904
  • जगह: बैड नॉहाइम, जर्मनी
  • उम्र: 65 साल

2. कारण
जमशेदजी को दिल की बीमारी थी। इलाज के लिए वो जर्मनी के बैड नॉहाइम गए थे। वहाँ हार्ट और ब्लड प्रेशर का मशहूर सेंटर था।
लेकिन इलाज के दौरान ही उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

3. अंतिम समय

  • मरते वक्त उनके साथ उनके बेटे दोराबजी टाटा थे।
  • कहते हैं कि अंतिम समय में उन्होंने अपने बेटों से यही कहा:
    “देश को सबसे आगे रखना। जो वादे मैंने किए हैं, उन्हें पूरा करना।”
  • वो अपने 4 सपनों – स्टील प्लांट, IISc, होटल, हाइड्रो पावर – को पूरा होते नहीं देख पाए।

4. अंतिम संस्कार

  • उनकी इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पारसी रीति से हुआ।
  • पहले शव को मुंबई लाने की बात थी, लेकिन जर्मनी में ही ब्रुकफील्ड कब्रिस्तान, वेर्किंग, इंग्लैंड में दफनाया गया।
  • कारण: पारसी परंपरा में शव को जल्दी दफनाना होता है और लंबी यात्रा संभव नहीं थी।

5. मौत के बाद क्या हुआ
जमशेदजी की मौत के वक्त लोग सोचते थे कि उनके सपने भी उनके साथ चले गए। लेकिन उनके बेटों दोराबजी टाटा और रतनजी टाटा ने पिता के हर सपने को पूरा किया:

  1. 1907: जमशेदपुर में TISCO शुरू हुआ – भारत का पहला स्टील प्लांट
  2. 1909: बेंगलुरु में IISc शुरू हुआ
  3. 1910: Tata Hydro-Electric Power शुरू हुई
  4. ताज होटल: 1903 में उनकी जिंदगी में ही खुल चुका था

गांधीजी ने कहा था: “जब हमें कोई असली उद्योगपति दिखाना हो, तो जमशेदजी टाटा का नाम लेना।”

जमशेदजी शरीर से गए, लेकिन उनकी सोच आज भी हर टाटा कंपनी में जिंदा है। इसीलिए टाटा ग्रुप के 66% शेयर Tata Trusts के पास हैं जो चैरिटी में लगते हैं।

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