आज का सन्देश
अतीत सपना है, भविष्य कल्पना है, सिर्फ वर्तमान ही अपना है। जो व्यक्ति वर्तमान का आनंद लेता है वह दुखों से बच जाता है। इसलिए ताकत से नहीं दिमाग से खेलों नाम भी होगा और काम भी, अर्जुन सा असमंजस आएगा तो हिस्से में श्रीकृष्ण भी आयेंगे।
जरूरत बस भरोसा रखने की है। बाहर की चुनोतियों से नही बल्कि हम स्वयं की अंदर की कमजोरियों के कारण हारते हैं। बांकी ख्वाहिशों का काफिला भी बड़ा अजीब है, अक्सर गुज़रता वहाँ से है जहाँ रास्ते नहीं होते।
भाग्य के द्वार पर सर पीटने से अच्छा है कर्म का बवंडर पैदा करें, सारे बंद दरवाजे स्वतः खुल जाएंगे। जीवन शतरंज के खेल की तरह है हम उठाये गए पग, वापस नही ले सकते। लेकिन हम, प्रयास कर, अगले पग को अच्छा बना सकते है।
















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