ग्राउंड रिपोर्ट करने वाले रिपोर्ट्स के साथ अभद्रता और अराजकता के कई वीडियो कल से वायरल है। कई महिला पत्रकारों के साथ जमकर बदसलूकी की गई है । प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया है, कपड़े फाड़ दिए गए, मोबाइल तक छीन लिए गए, कैमरा तोड़ दिए गए। लोकतंत्र में अहिंसक प्रदर्शनकरियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई हिंसा जायज नहीं ….तो इसी दलील के साथ सड़क पर काम कर रहे निहत्थे पत्रकारों के खिलाफ भी हिंसा को कैसे जायज ठहरा दिया जाय ?आपको किसी न्यूज प्लेटफॉर्म, न्यूज प्रेजेंटर या उसके एडिटोरल से समस्या है ,तो उसके खिलाफ विरोध के कई लोकतांत्रिक तरीके हैं जो संविधान प्रदत्त और कानून सम्मत है, उसका प्रयोग करें लेकिन इस तरह की मारपीट हिंसा और गुंडागर्दी से आंदोलन पवित्र नहीं बल्कि प्रदूषित होता है, और इसे कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता।
जंतर मंतर //महिला पत्रकारों के साथ जमकर बदसलूकी की गई है । प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया है, कपड़े फाड़ दिए गए, मोबाइल तक छीन लिए गए, कैमरा तोड़ दिए गए। लोकतंत्र में अहिंसक प्रदर्शनकरियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई हिंसा जायज नहीं












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