उदयपुर में स्थित सिटी पैलेस (City Palace) को ही मुख्य रूप से ऐतिहासिक उदयपुर किले या महल के रूप में जाना जाता है। पिछोला झील के किनारे स्थित यह शानदार महल मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की राजधानी और शक्ति का केंद्र रहा है。
उदयपुर के इस ऐतिहासिक किले के इतिहास के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- स्थापना (1559 ईस्वी)
मेवाड़ की राजधानी पहले चित्तौड़गढ़ में हुआ करती थी। मुगल आक्रमणों और सुरक्षा की दृष्टि से महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने 1559 में अरावली पहाड़ियों से घिरी सुरक्षित जगह पर उदयपुर शहर की स्थापना की और इसी दौरान सिटी पैलेस का निर्माण शुरू किया。 - 400 वर्षों का निर्माण कार्य
यह विशाल महल परिसर किसी एक राजा द्वारा नहीं बनवाया गया था। इसे बनने में लगभग 400 साल लगे。 महाराणा उदय सिंह के बाद, मेवाड़ के लगभग 22 अलग-अलग राजाओं (महाराणाओं) ने इसमें अपने-अपने महल, आंगन और मार्ग जोड़े
- वास्तुकला और परिसर
किले की वास्तुकला राजस्थानी, मुगल और यूरोपीय शैलियों का एक अनूठा मिश्रण है। ग्रेनाइट और संगमरमर से बने इस महल के मुख्य आकर्षण हैं - सूरजपोल (मुख्य द्वार)
- त्रिपोलिया (तीन मेहराबों वाला द्वार)
- मानक महल, भीम महल और कृष्ण विलास
- मोती महल (कांच की खूबसूरत नक्काशी)
- अमर विलास (लटकते हुए बगीचे)
- सुरक्षात्मक स्थिति
चित्तौड़गढ़ पर बार-बार हुए हमलों को देखते हुए उदयपुर को चुना गया था क्योंकि यह चारों तरफ से अरावली की पहाड़ियों और पिछोला झील से सुरक्षित था, जिससे दुश्मनों के लिए इस पर आक्रमण करना बहुत कठिन था。 - उदयपुर के इतिहास में दो अन्य महत्वपूर्ण किले भी शामिल हैं:
- कुंभलगढ़ किला: उदयपुर से लगभग 2 घंटे की दूरी पर स्थित, यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसकी विशाल दीवार (36 किमी) दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवार है











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