मन की धुलाई भी मन ही करेगा। यही शुद्ध मन हमें सच्चे सुख, संतोष और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।

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बहुत ज़्यादा तालियाँ झूठा कॉन्फिडेंस पैदा कर सकती हैं। ज़मीन से जुड़े रहना, विनम्र रहना, क्योंकि असली ताकत को स्पॉटलाइट की ज़रूरत नहीं होती। अपने काम को शोर से ज़्यादा ज़ोर से आवाज़ करने देना होगा।

इतना क्यों सिखाए जा रही हो ज़िन्दगी। हमें कौन सी सदियाँ गुज़ारनी है यहाँ। कीचड़ का कारण भी जल है, कीचड़ का निवारण भी जल है, मन को मन ही गंदा करता है, मन की धुलाई भी मन ही करेगा। यही शुद्ध मन हमें सच्चे सुख, संतोष और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।