LAOZI//उनका जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 604 या 571 ईसा पूर्व) में चीन के ‘चू’ राज्य में हुआ था। वे महात्मा बुद्ध और प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के समकालीन माने जाते हैं

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लाओत्से (Laozi या Lao Tzu) प्राचीन चीन के एक अत्यंत महान और रहस्यमयी दार्शनिक थे। उन्हें ताओ धर्म (Taoism) का संस्थापक और दुनिया के सबसे प्रभावशाली दार्शनिक ग्रंथों में से एक, ‘ताओ ते चिंग’ (Tao Te Ching) का लेखक माना जाता है।


चीनी भाषा में ‘लाओत्से’ का अर्थ ‘आदरणीय वृद्ध गुरु’ (Old Master) होता है।


लाओत्से के जीवन, दर्शन और उनसे जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  1. जीवन और इतिहास (Biography)
    समय काल: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, उनका जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 604 या 571 ईसा पूर्व) में चीन के ‘चू’ राज्य में हुआ था। वे महात्मा बुद्ध और प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के समकालीन माने जाते हैं।


शाही पुस्तकालयाध्यक्ष (Archivist): लाओत्से झोऊ राजवंश की राजधानी में शाही पुस्तकालय के प्रभारी (लाइब्रेरियन या रिकॉर्ड कीपर) थे। इस पद पर रहने के कारण उन्हें प्राचीन इतिहास, किताबों और राजकीय फैसलों का गहरा ज्ञान मिला。
रहस्यमयी प्रस्थान: जब झोऊ राजवंश का पतन होने लगा और समाज में अराजकता फैली, तो लाओत्से ने सब कुछ छोड़ दिया। वे एक काले बैल (या पानी की भैंस) पर सवार होकर पश्चिम की ओर (हिमालय की तरफ) निकल गए। सीमा पार करते समय वहां के संतरी (Yinxi) के अनुरोध पर उन्होंने अपनी शिक्षाओं को एक छोटी सी पुस्तक में लिखा, जिसे ‘ताओ ते चिंग’ कहा गया। इसके बाद वे हमेशा के लिए ओझल हो गए.

  1. लाओत्से का मुख्य दर्शन (Core Philosophy)
    लाओत्से का पूरा दर्शन प्रकृति के नियमों और आंतरिक शांति पर आधारित है:
    ताओ (The Way): ‘ताओ’ का अर्थ है ‘मार्ग’ या ‘प्रकृति का नियम’। उनके अनुसार, ब्रह्मांड की एक अपनी लय है। मनुष्य को प्रकृति के खिलाफ जाने के बजाय उसके साथ तालमेल (Harmony) बिठाकर जीना चाहिए.
    वू-वेई (Wu-Wei / Non-Action): इसका मतलब ‘अकर्मण्यता’ या आलस नहीं है, बल्कि “सहजता से कार्य करना” है। जैसे पानी बिना किसी प्रयास के अपना रास्ता बना लेता है, वैसे ही मनुष्य ,,,