नेपाल में बीते महीने के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे हिमालय में ग्लेशियर का ढहना माना जा रहा है। इसने ग्लेशियर पिघलने और इससे पैदा होने वाले खतरों पर बहस को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस बीच एक नई स्टडी में सामने आया है कि ग्लोबल वार्मिंग और दूसरे कारणों के साथ-साथ इंसान का पेशाब किसी ग्लेशियर के पिघलाने का बड़ा कारण है, जो माउंट एवरेस्ट पर हो रहा है। खासतौर से एवरेस्ट पर लगने वाले कैंप इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
नेपाली और अमेरिकी वैज्ञानिकों की रीजनल एनवायर्नमेंटल चेंज जर्नल में पब्लिश स्टडी से पता चलता है कि हर साल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों का पेशाब क्लाइंबिंग सीजन यानी हर साल करीब 2500 टन बर्फ पिघला रहा है। एवरेस्ट बेस कैंप खुम्बु ग्लेशियर के ऊपर लगता है। ग्लेशियर पर हर साल 1,600 टेंट लगते हैं। इनमें किचन, शॉवर, जनरेटर, वाई-फाई और दूसरी सुविधाएं होती हैं। इनसे निकलने वाली गर्मी जमीन का तापमान बढ़ाती है।











