माओ त्से तुंग (माओ जेदोंग)
चीन के सबसे बड़े और सबसे विवादित नेता। चीन आज जो है, उनकी ही बनाई नींव पर खड़ा है।
- जन्म और शुरुआती जीवन
- जन्म: 26 दिसंबर 1893, हुनान प्रांत के शाओशान गाँव में, एक किसान परिवार में।
- बचपन में बहुत किताबें पढ़ते थे, खासकर पुराने चीनी योद्धाओं की कहानियां।
- युवा अवस्था में लाइब्रेरियन की नौकरी भी की, वहीं मार्क्सवाद पढ़ा।
- क्रांति की राह
- 1921 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के संस्थापकों में से एक बने।
- उस समय चीन पर जापान और अंग्रेजों का दबाव था, अंदर गृहयुद्ध चल रहा था।
- 1934-35 का लॉन्ग मार्च – 9000 किमी पैदल चलकर दुश्मन से बचे। इसी मार्च से वे किसानों के हीरो बन गए। कहा जाता था – “माओ किसानों के बीच मछली की तरह है, जैसे पानी में मछली।”
- नए चीन का जन्म
- 1 अक्टूबर 1949 को बीजिंग के तियानमेन चौक से घोषणा की – “आज चीन खड़ा हो गया है”। और पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की।
- चेयरमैन बने और 1949 से 1976 तक चीन के सर्वोच्च नेता रहे।
- उनके बड़े काम
A) अच्छा माना जाने वाला:
- 100 साल से बिखरे हुए चीन को एक देश बनाया
- औरतों को बराबर का हक, जमींदारी खत्म, सबको पढ़ना-लिखना सिखाया
- उनका लाल किताब (Little Red Book) दुनिया में सबसे ज्यादा छपने वाली किताबों में से एक है
B) विवादित माना जाने वाला:
- ग्रेट लीप फॉरवर्ड (1958-62): तेजी से देश को औद्योगिक बनाने की योजना, पर इसमें बड़ा अकाल पड़ा, लाखों लोगों की मृत्यु हुई
- सांस्कृतिक क्रांति (1966-76): पुरानी संस्कृति, किताबें, मंदिरों को हटाकर नया समाज बनाने का आंदोलन। इसमें चीन के बहुत से पुराने मंदिर और ग्रंथ नष्ट हो गए
- मृत्यु और विरासत
- मृत्यु: 9 सितंबर 1976, बीजिंग में
- आज भी बीजिंग में तियानमेन चौक पर उनकी समाधि है, हर चीनी नोट पर उनकी तस्वीर है
- चीन के लोग उन्हें “महान हेल्म्समैन” कहते हैं – जो जहाज को तूफान से निकाल लाया
एक बात समझने वाली है – माओ ने तलवार से चीन को जोड़ा, पर उनकी नीतियों ने बहुत दुःख भी दिया। इसीलिए चीन में आज भी उनके बारे में दो तरह की राय है















