*श्री रामचरितमानस*
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।। चौपाई ।।~~~~~
सुनहू उमा ते लोग
अभागी।
हरि तजि होहिं
बिषय अनुरागी।
भावार्थ :- भगवान शिव जी माता पार्वती जी से कहते हैं कि मानव जन्म का मूल उद्देश्य ईश्वर की भक्ति और आत्म -कल्याण है, परन्तु जो लोग भगवान के आनंदमयी स्वरूप को भूलकर क्षणभंगुर सांसारिक सुखों, धन संपत्ति और कामवासनाओं के पीछे भागते हैं,वे वास्तव में अपना ही नुकसान करते हैं,वे बड़े अभागे हैं जिन्हें दुर्लभ मानव शरीर और ईश्वर भक्ति का अवसर तो मिला, लेकिन उन्होंने उसे सांसारिक माया मोह के बदले व्यर्थ गंवा दिया , जैसे कोई अमृत को छोड़कर बिष को चुन ले अर्थात सांसारिक विषय भोग क्षणिक सुख और अंततः दुख देते हैं , जबकि भगवान की भक्ति ही जीवन में स्थाई शांति , आंनद और मुक्ति प्रदान करती है~~~~~~















