अहमदाबाद में 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है. इस मामले में 38 आतंकियों को दी गई फांसी की सजा बरकरार रखी गई है, वहीं 11 आतंकियों की आजीवन कैद की सजा भी बरकरार रहेगी.
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.”
यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था
लालकिला कार बम ब्लास्ट केस में 13 जुलाई को होगी सुनवाई

वहीं, दिल्ली में नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले में भी एक और जांच चल रही है, जिसमें एनआईए ने धमाके में मारे गए लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल की है। कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है। एनआईए के मुताबिक, गाड़ी में तेज धमाके से 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। साथ ही आसपास की संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
एनआईए ने 9 आरोपियों को स्पेशल जज पीतांबर दत्त के सामने पेश किया, जिन्होंने उनकी न्यायिक हिरासत को अगली तारीख तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने मामले को 13 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
एनआईए पहले ही शाहीन सईद और अन्य सहित 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट के खिलाफ दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर भी पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए कोर्ट में विचार किया जाना बाकी है।












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