ईश्वर इंसान के तन (शरीर की अवस्था), मन (विचार, भावनाएं) और धन (कर्मों का फल और सांसारिक स्थिति)—इन तीनों के बारे में पूरी तरह जानते हैं। अध्यात्म में ईश्वर को सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाला) और अंतर्यामी (हृदय की बात जानने वाला) माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों और संत मत में इसके बारे में स्पष्ट कहा गया है:
गीता का ज्ञान: भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद गीता में बताया है कि वे सभी प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं और हर इंसान के मन की स्थिति से अवगत होते हैं।
मन की प्रधानता: भक्तिकाल और संतों के अनुसार, ईश्वर को रिझाने के लिए सिर्फ धन की जरूरत नहीं होती, वे इंसान के मन (निष्कपट भाव और समर्पण) को सबसे अधिक महत्व देते हैं।
सब कुछ उनका है: मनुष्य का तन, मन और धन सब कुछ उसी परम शक्ति की देन है, और जब इंसान यह मानकर अपना जीवन जीता है, तो ईश्वर उसके हर सुख-दुख का ध्यान रखते हैं।
















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