बुद्धि के गुनौ का विकास करें,
प्रत्येक व्यक्ति के पास में बुद्धि है पर बुद्धि के गुनौ का विकास हर कोई नहीं कर सकता है जो व्यक्ति बुद्धि के गुनौ का विकास करना प्रारंभ कर देता है उस व्यक्ति के जीवन के अंदर अपने आप ही ज्ञान का उजाला होना प्रारंभ हो जाता है
बुद्धि का विकास है यह कैसे किया जाए इस पर भी हमारे को अवश्य ही एक बार बहुत ही गंभीरता के साथ चिंतन करना प्रारंभ कर देना चाहिए बुद्धि के विकास के कई कारण है जिससे हम अपने बुद्धि का विकास करने में सफलता प्राप्त कर सकते हैं
बुद्धि के विकास का प्रथम आधार है हम सुनना प्रारंभ करें जबतक हम सुनना प्रारंभ नहीं करेंगे तब तक हमारी बौद्धिक क्षमता वह कभी भी बढ़ेगी नहीं इसलिए बुद्धि के गुण का विकास के लिए आवश्यक है हम अच्छी बातों को सुनना प्रारंभ कर दें
केवल सुनने से ही काम चलने वाला नहीं है सुनने के साथ अंदर कुछ ना कुछ ग्रहण करना भी प्रारंभ करें जब हम ग्रहण करना प्रारंभ करेंगे तब हमारे लिए विकास का एक महान द्वार अपने आप हमारे को खुलता हुआ नजर आना प्रारंभ हो जाएगा
तीसरा बुद्धि के विकास का महत्वपूर्ण जो सूत्र है सुनने के बाद में ग्रहण करना ग्रहण करने के पश्चात उसको अपने जीवन के अंदर धारण करना सुनने वाले मिल जाएंगे ग्रहण करने वाले मिल जाएंगे पर धारण करने वाले व्यक्ति बहुत ही कम मिलते हैं जब हम धारण करना प्रारंभ कर देंगे हमारा जीवन अपने आप ही सद्गुणों का भंडार बनना प्रारंभ हो जाएगा
सुनना ग्रहण करना धारण करने के पश्चात उसे भी एक महत्वपूर्ण सूत्र वह और है जो हमने सुना है ग्रहण किया है धारण किया है उसे ज्ञान के साथ के अंदर दूसरों से चर्चा पर्चा भी करना प्रारंभ कर दें जब हम तर्क वितर्क करना प्रारंभ करेंगे तब हमारी बौद्धिक क्षमता है वह और ज्यादा बढ़नी प्रारंभ हो जाएगी बुद्धि विकास के महत्वपूर्ण सूत्रों को अपने जीवन में अंगीकार करने का प्रयास करें
ज्ञान की पाठशाला का प्रत्येक विद्यार्थी ज्ञान के लाभ को कब प्राप्त कर सकता है जब वह अपने अध्यापक की बात को सुनना प्रारंभ करेगा सुनने के पश्चात कुछ ग्रहण करना प्रारंभ करेगा ग्रहण करने के पश्चात अपने जीवन के अंदर अवतरण करना प्रारंभ करेगा तभी वह विद्यार्थी ज्ञानशाला पाठशाला में अपने जीवन में अवश्य चरितार्थ करना प्रारंभ कर देगा
।। जय सियाराम जी।।
।। ॐ नमः शिवाय।।
















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