दिल्ली हाई कोर्ट की लिव-इन रिश्ते पर बड़ी टिप्पणी ने सबका ध्यान खींचा है। कोर्ट ने कहा कि दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं तो माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त उनकी जिंदगी में जबरन दखल नहीं दे सकते।
ऐसे रिश्ते में रहने वालों को अपनी पसंद से जीवन जीने और सुरक्षा पाने का अधिकार है। यह टिप्पणी एक कपल की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। हालांकि, कोर्ट ने साफ तौर पर लिव-इन को हर कानूनी मामले में शादी के बराबर नहीं माना है।











