यह प्रसंग इतिहास के सबसे अनोखे और हैरान कर देने वाले अध्यायों में से एक है। जब पूरी दुनिया को जीतने निकला सिकंदर, भारत के इन संतों के ज्ञान के सामने नतमस्तक हो गया।
आइए जानते हैं संत कलानास (Kalanos) की वो भविष्यवाणियाँ जिन्होंने सिकंदर को हिला कर रख दिया, और राजा पुरु (पोरस) के साथ हुए युद्ध की वो रणनीतियाँ जिसने सिकंदर का घमंड तोड़ दिया।
1. संत कलानास की हैरान करने वाली भविष्यवाणी

जब सिकंदर भारत से वापस लौट रहा था, तो संत कलानास उसके साथ फारस (Persia) तक गए। वहां पहुँचकर कलानास गंभीर रूप से बीमार हो गए। वे एक सच्चे योगी थे, इसलिए उन्होंने बीमारी से तड़पने के बजाय ‘समाधि’ (जीते जी खुद को अग्नि को समर्पित करना) लेने का निर्णय लिया।
चित्ता पर शांत बैठना: यूनानी इतिहासकार लिखते हैं कि जब कलानास जलती हुई चिता पर बैठे, तो उनके चेहरे पर दर्द का एक शिकन भी नहीं था। वे मुस्कुरा रहे थे।
अंतिम भविष्यवाणी: चिता पर बैठने से ठीक पहले सिकंदर उनसे आखिरी बार मिलने आया और पूछा कि क्या वे कोई अंतिम संदेश देना चाहते हैं? कलानास मुस्कुराए और बोले: “सिकंदर, हमारी अगली मुलाकात बहुत जल्द बेबीलोन (Babylon) में होगी।
रहस्यमयी सच: सिकंदर को उस समय इस बात का मतलब समझ नहीं आया, क्योंकि वह पूरी तरह स्वस्थ था। लेकिन इस घटना के ठीक एक साल बाद, 323 ईसा पूर्व में, मात्र 32 वर्ष की आयु में सिकंदर की बेबीलोन में रहस्यमयी बीमारी से मृत्यु हो गई। कलानास की वह भविष्यवाणी बिल्कुल सच साबित हुई।











