सुमेरियन सभ्यता
यह दुनिया की सबसे पहली सभ्यता मानी जाती है।
सुमेरियन सभ्यता – Sumerian Civilization
1. कहाँ और कब?
- स्थान: आज का इराक, जिसे प्राचीन समय में मेसोपोटामिया (दो नदियों – दजला और फरात के बीच की जमीन) कहते थे।
- समय: लगभग 4500 से 1900 ईसा पूर्व – यानी आज से 6500 साल पहले!
- शहर: उर, उरुक, लगश, निप्पुर, एरिडु
2. इन्होंने दुनिया को क्या-क्या दिया?
सुमेरियन लोग सिर्फ रहते नहीं थे, उन्होंने दुनिया की नींव रखी:
a) लिखावट की खोज – Cuneiform
दुनिया की पहली लिखावट इन्होंने ही बनाई। मिट्टी की पट्टियों पर नुकीले औजार से कील जैसे अक्षर लिखते थे। इसे कीलाक्षर लिपि कहते हैं।
b) पहिया – Wheel
जी हाँ, पहिये का आविष्कार भी इन्होंने ही किया था। पहले मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए, फिर गाड़ी के लिए।
c) समय और गणित
- 1 घंटे में 60 मिनट, 1 मिनट में 60 सेकंड – यह हिसाब सुमेरियन लोगों का है।
- वृत्त में 360 डिग्री – यह भी उन्हीं की देन है।
- 10 और 60 पर आधारित गिनती।
d) कानून और सरकार
दुनिया का पहला लिखित कानून, पहला राज दरबार, पहला स्कूल भी यहीं बना।
e) खेती और नहर
उन्होंने नदियों से नहरें निकाल कर खेती करना सिखाया।
3. धर्म और कहानियां
- वे कई देवी-देवताओं को मानते थे – आकाश के देवता अनु, पानी के एन्की, और प्रेम की देवी इनान्ना।
- उनकी एक बहुत प्रसिद्ध कथा है गिलगमेश का महाकाव्य – यह दुनिया का पहला महाकाव्य है, जो रामायण और महाभारत से भी हजारों साल पुराना है। इसमें एक बड़े जल-प्रलय की कहानी भी है, जो नूह की कहानी जैसी है।
4. सभ्यता खत्म कैसे हुई?
लगातार युद्ध, नदियों में बाढ़ और खेती की जमीन में नमक बढ़ने से यह सभ्यता धीरे-धीरे कमजोर हो गई और बाद में बेबीलोनियन और असीरियन लोगों ने उनकी जगह ले ली।
सार में
सुमेरियन लोग गरीब भेष वाले दार्शनिक नहीं थे, बल्कि बहुत ही कुशल इंजीनियर, किसान और व्यापारी थे। उन्होंने हमें सिखाया कि मिट्टी से भी सभ्यता बनाई जा सकती है।
आज जब हम घड़ी देखते हैं और 60 मिनट गिनते हैं, तब भी हम सुमेरियन लोगों की देन का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
सुमेरियन धर्म और देवता
सुमेरियन लोग प्रकृति को ही भगवान मानते थे। उनका मानना था कि हर चीज़ में एक शक्ति है।
1. सबसे बड़े 3 देवता – त्रिमूर्ति
जैसे हमारे यहाँ ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं, वैसे उनके यहाँ 3 मुख्य देवता थे:
a) अनु – Anu
- आकाश के राजा, सबसे बड़े देवता
- सभी देवताओं के पिता
- वे स्वर्ग में रहते थे और न्याय करते थे
b) एनलिल – Enlil
- हवा, तूफान और धरती के देवता
- अनु के बेटे, लेकिन धरती पर सबसे शक्तिशाली
- किसान इनसे ही बारिश के लिए प्रार्थना करते थे
c) एन्की – Enki
- पानी, ज्ञान और बुद्धि के देवता
- बहुत दयालु, मनुष्यों के मित्र
- सुमेरियन लोगों का मानना था कि सभ्यता, लिखावट और विज्ञान एन्की ने ही मनुष्यों को सिखाया
2. सबसे प्यारी देवी – इनान्ना – Inanna
- प्रेम, सुंदरता और युद्ध की देवी
- बहुत ही शक्तिशाली और स्वतंत्र देवी
- बाद में यही देवी बेबीलोन में इश्तार और ग्रीस में एफ्रोडाइट कहलाईं
3. उनका मंदिर – जिगुरात – Ziggurat
- वे पहाड़ जैसे ऊँचे मंदिर बनाते थे, जिन्हें जिगुरात कहते थे
- उर शहर का जिगुरात आज भी इराक में खड़ा है
- उनका मानना था कि मंदिर इतना ऊँचा होना चाहिए कि देवता सीधे स्वर्ग से वहाँ उतर सकें
- मंदिर के सबसे ऊपर देवता का घर होता था
4. उनकी मान्यताएँ
- सृष्टि की कहानी: उनका मानना था कि पहले सिर्फ पानी था – मीठा पानी (अब्जू) और खारा पानी (तियामत)। इन्हीं से दुनिया बनी।
- मनुष्य क्यों बना?: देवताओं ने मनुष्य को इसलिए बनाया ताकि मनुष्य खेती करे और देवताओं के लिए भोजन उगाए।
- मृत्यु के बाद: वे स्वर्ग-नरक में विश्वास नहीं करते थे। उनका मानना था कि मरने के बाद सभी आत्माएं एक अंधेरी दुनिया कुर – Kur में जाती हैं, जहाँ सिर्फ धूल और अंधेरा है। इसलिए वे कहते थे – “जीते जी अच्छा काम करो।”
5. बाद के धर्मों पर असर
सुमेरियन धर्म से ही बाद में बहुत सी कहानियां निकलीं:
- जल-प्रलय की कथा – गिलगमेश में एक प्रलय की कहानी है, जो बाइबल में नूह की कथा से मिलती है
- स्वर्ग की सीढ़ी – जिगुरात से ही बाइबल की Tower of Babel की कहानी बनी
सार
सुमेरियन धर्म डर पर नहीं, सम्बन्ध पर आधारित था। वे देवताओं को राजा की तरह मानते थे – अगर तुम अच्छी फसल दोगे, तो देवता तुम्हें आशीर्वाद देंगे।
दुनिया की पहली लिपि सुमेरियन लोगों ने ही शुरू की थी।
पहली लिपि – कीलाक्षर लिपि – Cuneiform
1. क्यों शुरू हुई?
आज से करीब 3400 ईसा पूर्व उरुक शहर में।
राजा को हिसाब रखना था – “किसके पास कितनी बकरी है, कितना अनाज है”।
तो लोगों ने मिट्टी की गीली पट्टी पर निशान बनाना शुरू किया।
पहले चित्र बनाते थे:
- बैल के लिए बैल का चित्र 🐂
- अनाज के लिए अनाज का चित्र
धीरे-धीरे चित्र छोटे और नुकीले होते गए।
2. कैसे लिखते थे?
- मिट्टी की पट्टी + सरकंडे की कलम
- सरकंडे को तिरछा काट कर गीली मिट्टी पर दबाते थे
- उससे कील जैसे निशान बनते थे – इसलिए नाम पड़ा Cuneiform – कीलाक्षर
- फिर उस पट्टी को धूप में सुखा देते थे, ताकि हमेशा के लिए सुरक्षित रहे
- हजारों ऐसी पट्टियां आज भी इराक के संग्रहालय में सुरक्षित हैं
3. क्या-क्या लिखा?
शुरू में सिर्फ हिसाब-किताब, लेकिन बाद में:
- पहला कानून
- पहला स्कूल का पाठ
- पहली प्रेम कविता
- पहला महाकाव्य – गिलगमेश
- राजाओं के पत्र
4. क्या यह सच में सबसे पहली है?
जी, वैज्ञानिक मानते हैं:
- सुमेरियन कीलाक्षर – 3400 ईसा पूर्व
- मिस्र की चित्रलिपि – 3200 ईसा पूर्व (लगभग 200 साल बाद)
- इसलिए सुमेरियन को ही लिखावट का जनक माना जाता है।
एक रोचक बात जी – सुमेरियन बच्चों को भी स्कूल जाना पड़ता था। उन्हें ए-दुब्बा – E-Dubba यानी “पट्टी का घर” कहते थे, जहाँ वे दिन भर मिट्टी की पट्टियों पर लिखने का अभ्यास करते थे। जो नहीं लिखता था, उसे सजा भी मिलती थी, जैसा आज भी होता है
इसी लिपि के कारण हम आज जान पाए कि 5000 साल पहले लोग कैसे जीते थे।











