महारानी कामसुंदरी देवी //1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए उन्होंने राज परिवार की ओर से लगभग 600 किलोग्राम सोना सरकार को दान किया था।सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्य: उन्होंने मिथिला की कला, साहित्य, इतिहास और धरोहर के संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

Spread the love

महारानी कामसुंदरी देवी (मूल नाम: कल्याणी देवी) बिहार के प्रसिद्ध राज दरभंगा (खंडवाल राजवंश) के अंतिम महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उनका निधन 12 जनवरी 2026 को 94 वर्ष की आयु में दरभंगा स्थित उनके आवास ‘कल्याणी निवास’ में हुआ था। उन्हें देश की आखिरी जीवित महारानियों में एक माना जाता था।
जीवन परिचय और पृष्ठभूमि
जन्म: 22 अक्टूबर 1932 को मधुबनी जिले के मंगरौनी गांव में हुआ था।


परिवार: उनके पिता पंडित हंसमणि झा एक प्रख्यात विद्वान थे। उनका परिवार मैथिल विद्वानों की परंपरा से जुड़ा था।


विवाह: उनका विवाह 6 मई 1943 को महाराजा कामेश्वर सिंह के साथ हुआ था। 1962 में महाराजा के निधन के बाद वह सादगी भरा जीवन जीने लगीं।
ऐतिहासिक योगदान और समाज सेवा
स्वर्ण दान: वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए उन्होंने राज परिवार की ओर से लगभग 600 किलोग्राम सोना सरकार को दान किया था।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्य: उन्होंने मिथिला की कला, साहित्य, इतिहास और धरोहर के संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित किया।


कल्याणी फाउंडेशन: उनके द्वारा स्थापित ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से मिथिला क्षेत्र में शिक्षा और सामाजिक विकास के कई कार्य किए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *