प्रेस विज्ञप्ति
ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या के दिन अपनी राशि के अनुसार करें दान : महंत रोहित शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि 14 जून, रविवार को दोपहर 12:20 बजे के बाद करें।
ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान, जप-तप आदि 15 जून, सोमवार को सुबह 8:34 बजे से पहले करना शुभ रहेगा।
अमावस्या पर करें ये विशेष उपाय, जिनसे आप सुखी और समृद्ध जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर – अमावस्या तिथि माह में एक बार आती है, जिसका स्वामी पितृदेव माने जाते हैं। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री, ज्योतिषाचार्य ने जानकारी देते हुए बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष ज्येष्ठ अधिकमास अमावस्या तिथि 14 जून, रविवार को दोपहर 12:20 बजे प्रारंभ होकर 15 जून, सोमवार को सुबह 8:34 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी अमावस्या तिथि 15 जून सोमवार को है।
पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण आदि 14 जून रविवार को दोपहर 12:20 बजे के बाद करें, जबकि स्नान, दान, जप-तप आदि 15 जून सोमवार को सुबह 8:34 बजे से पहले करना शुभ रहेगा। ज्येष्ठ अमावस्या का व्रत 15 जून सोमवार को होगा।
अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व
इस दिन हरिद्वार जैसे तीर्थों तथा पवित्र नदियों में स्नान विशेष पुण्यदायी होता है। यदि तीर्थस्थलों पर स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर ज़रूरतमंदों को यथासंभव दान अवश्य करें।
पितृशांति हेतु उपाय
अमावस्या पर उपवास रखने से पितृगण, ब्रह्मा, इन्द्र, सूर्य, अग्नि, वायु, ऋषि, पशु-पक्षी एवं अन्य जीव तृप्त होते हैं। सूर्योदय के समय स्नान कर सामर्थ्य अनुसार तिल, दूध, तिल की मिठाई आदि का दान दरिद्रता दूर करता है।
पीपल वृक्ष के नीचे कच्ची लस्सी, गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल और पुष्प अर्पित करें। ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करें और पितृसूक्त का पाठ करें।
सूर्य को अर्घ्य देना:
तांबे के पात्र में गंगाजल, लाल चंदन व शुद्ध जल मिलाकर सूर्य को तीन बार अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करें।
अन्य लाभकारी उपाय:
नीलकंठ स्तोत्र, सर्पसूक्त, श्रीनारायण कवच का पाठ करें।
दिवंगत प्रियजन की पसंदीदा मिठाई व दक्षिणा सहित ब्राह्मण भोजन कराएं।
नि:संतान व्यक्तियों को संतान प्राप्ति का योग बनता है।
राहु दोष निवारण हेतु चांदी के नाग-नागिन की पूजा कर बहते जल में प्रवाहित करें।
ईशान कोण में लाल धागे की बत्ती वाला गाय के घी का दीपक जलाएं।
व्यवसाय में उन्नति हेतु चांदी का पीपल का वृक्ष बनाकर दान करें।
भगवान विष्णु को झंडा अर्पित करें तथा माता लक्ष्मी को खीर-मेवा का भोग लगाएं।
विशेष सावधानियां:
तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शराब आदि मादक पदार्थों से दूर रहें।
व्रतधारी बाल, दाढ़ी, नाखून न काटें।
चमड़े की वस्तुएं व काले वस्त्र न पहनें।
किसी का दिल न दुखाएं – यह सबसे बड़ा पाप माना गया है।
राशि अनुसार दान का महत्व:
मेष: मूंगफली, काले चने, भूमि
वृष: सफेद वस्त्र, मोती, तेल, दूध, चीनी
मिथुन: हरी वस्तुएं, कांसा, हरा चारा, पन्ना
कर्क: चावल, आटा, घी, दूध, दही, मोती
सिंह: तांबा, केसर, लाल वस्त्र, गुड़
कन्या: हरी वस्तुएं, कांसा, हरी सब्जी, पन्ना
तुला: सफेद वस्त्र, मोती, दही, चीनी
वृश्चिक: लाल वस्त्र, मूंगा, भूमि, नारियल
धनु: केला, पीली वस्तुएं, सोना, केसर, पुस्तक
मकर: तेल, नीले-काले वस्त्र, तिल, लोहा
कुंभ: लोहा, काले कपड़े, सरसों का तेल, तिल
मीन: हल्दी, केला, दाल चना, शहद, पीली वस्तुएं
संपर्क: महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)
प्रधान, श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत)
स्थान: रायपुर (ठठर), जम्मू-कश्मीर
मोबाइल: 9858293195, 7006711011
ईमेल: rohitshastri.shastri1@gmail.com
















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