आज़ाद हिंद सरकार की आज हुई थी स्थापना
आज़ाद हिंद फौज (Indian National Army या INA) द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बनाई गई एक सशस्त्र सेना थी, जिसका उद्देश्य अंग्रेजों के शासन से भारत को पूरी तरह स्वतंत्र कराना था।
आज़ाद हिंद फौज का इतिहास और गठन
- स्थापना (1942): आज़ाद हिंद फौज का विचार सबसे पहले कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था। इसे दक्षिण-पूर्व एशिया में जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों और वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों की मदद से 1942 में गठित किया गया था। इसमें रास बिहारी बोस का भी बड़ा योगदान था।
- नेताजी का नेतृत्व (1943): जुलाई 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में इस फौज की कमान संभाली। उन्होंने इसे एक नया जीवन और अनुशासन दिया।
- आज़ाद हिंद सरकार: 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर में ‘आज़ाद हिंद सरकार’ (अंतिम या निर्वासित सरकार) की स्थापना की और इस सेना को उसका सैन्य बल बनाया।
प्रमुख विशेषताएँ और योगदान
- नारे और प्रेरणा: नेताजी ने सेना को “दिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” जैसे ओजस्वी नारे दिए, जिनसे पूरे देश में देशभक्ति की लहर दौड़ गई।
- रानी झांसी रेजिमेंट: आज़ाद हिंद फौज में महिलाओं के लिए एक अलग रेजिमेंट बनाई गई थी, जिसका नाम ‘रानी झांसी रेजिमेंट’ था। यह विश्व इतिहास की पहली महिला लड़ाकू रेजिमेंटों में से एक थी।
- युद्ध अभियान: इस फौज ने जापानी सेना के सहयोग से बर्मा (अब म्यांमार) और भारत की पूर्वी सीमा पर अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा मुकाबला किया। 30 दिसंबर 1943 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर तिरंगा झंडा भी फहराया गया।
लाल किले का मुकदमा और प्रभाव
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा। 1945 में अंग्रेजों ने इसके प्रमुख अधिकारियों (शाहनवाज खान, प्रेम सहगल और गुरुबख्श सिंह ढिल्लन) पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चलाया। इसके विरोध में पूरा देश उठ खड़ा हुआ और इस मुकदमे ने भारत की आज़ादी के आंदोलन को और अधिक तीव्र कर दिया, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175











