पुस्तक ‘सी-यू-की’ // राजा हर्षबर्धन के शासन काल में हुएनसांग दुनिया में पहले पत्रकारिता का परिचय दिये थे

Spread the love
  • राजा हर्षवर्धन का जन्म 590 ईस्वी में थानेसर (हरियाणा) के राजा प्रभाकरवर्धन और रानी यशोमती के घर हुआ था।
  • गद्दी संभालना: मात्र 16 वर्ष की आयु में, अपने बड़े भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद उन्होंने 606 ईस्वी में शासन संभाला।
  • बदला और संघर्ष: मालवा के राजा देवगुप्त और बंगाल के शशांक ने उनके बहनोई की हत्या कर दी थी और बहन राजश्री को कैद कर लिया था। हर्ष ने अपनी बहन को छुड़ाया और उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया।

[साम्राज्य विस्तार और प्रशासन]

उनका साम्राज्य पश्चिम में पंजाब-गुजरात से लेकर पूर्व में असम तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में नर्मदा नदी तक फैला था। प्रशासन: वे प्रजावत्सल और परोपकारी सम्राट थे। उनके राज्य में यात्रियों के लिए धर्मशालाएं, अस्पताल और अन्न सत्र चलते थे। वेनसांग का आगमन: प्रसिद्ध चीनी यात्री हुएनसांग उनके शासनकाल में भारत आए थे, जिन्होंने हर्ष की न्यायप्रियता और प्रशासनिक व्यवस्था की बहुत प्रशंसा की। और अपने ताम्र पत्र में लिखी कर दुनिया में पहले पत्रकारिता का आध्या शुरू किया

[कला, साहित्य और दानशीलता]

साहित्यकार राजा: हर्षवर्धन स्वयं एक उच्च कोटि के लेखक और कवि थे। उन्होंने रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद जैसे संस्कृत नाटकों की रचना की। संरक्षण: उनके दरबार में महान कवि बाणभट्ट रहते थे, जिन्होंने हर्षचरितम् की रचना की। महादान: प्रयाग में हर पांच वर्ष पर वे एक विशाल महामोक्ष परिषद का आयोजन करते थे, जिसमें वे अपना राजकोष से आभूषण दान करते थे

[साम्राज्य का अंत]

647 ईस्वी में हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद कोई योग्य वारिस न होने के कारण उनका विशाल साम्राज्य धीरे-धीरे बिखर गया और समाप्त हो गया।

Oplus_131072

हुएनसांग ने अपनी पुस्तक ‘सी-यू-की’ (Si-Yu-Ki – पश्चिमी दुनिया का रिकॉर्ड) में भारत के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन का बहुत बारीक और सटीक विवरण दिया।

तथ्यों का संकलन: एक आधुनिक पत्रकार की तरह, उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान जो देखा और सुना, उसे बिना किसी मिर्च-मसाले के दस्तावेज़ के रूप में दर्ज किया। सम्राट हर्षवर्धन के काल का इतिहास जानने के लिए उनके लेख आज भी सबसे प्रामाणिक स्रोत माने जाते हैं।