मन ही बंधन का कारण है, और मन ही मुक्ति का मार्ग। यदि मन द्वेष से भरा हुआ है, तो सुख के बीच भी अशांति रहेगी ।

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मन ही बंधन का कारण है, और मन ही मुक्ति का मार्ग। यदि मन द्वेष से भरा हुआ है, तो सुख के बीच भी अशांति रहेगी ।

और यदि मन जागरूक है तो कठिन परिस्थितियों में भी शांति सम्भव है। मन ही है जो तृष्णा को बार-बार जगाता और उकसाता रहता है।

इसलिए मन पर नियंत्रण रखना ही मनुष्य की असली विजय है।