रक्षाबंधन अर्थात् सुरक्षा के संकल्प का एक बंधन। बहनों की रक्षा के संकल्प से बंध जाना ही रक्षाबंधन है। रक्षा बंधन मनाने के पीछे एक दृष्टि यह भी है कि हमारे मन में प्रत्येक पर नारी के प्रति बहन की दृष्टि का भाव ही उत्पन्न हो सके।
रक्षा सूत्र बंधन जैसा पर्व प्रत्येक वर्ष इसलिए भी मनाया जाता है ताकि हमारी वासनामय दृष्टि उपासनामय बन सके।
हम अपनी बहनों को तो रक्षा का वचन दें ही दें, साथ में उन्हें यह वचन भी अवश्य दें कि आज से कोई भी अकेली स्त्री मेरी दृष्टि में एक अवसर नहीं अपितु एक जिम्मेदारी होगी।
आज के दिन हम सभी को यह बात अवश्य ध्यान में रखनी चाहिए कि ” मैं अपनी बहन की रक्षा के संकल्प के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की समस्त बहनों के आत्मसम्मान, शील और अस्मिता की रक्षा का भी संकल्प लेता हूँ।”
यथार्थ में दृष्टि को परिमार्जित और व्यापक करते हुए हमारे मन-मष्तिष्क में समाज में परस्पर एक-दूसरे में भाई – बहन का भाव ही दृढ़ता से समाहित हो, यही इस पावन पर्व का प्रमुख उद्देश्य भी है।
भाई-बहन के अगाध स्नेह एवं अटूट विश्वास के प्रतीक, महापर्व रक्षाबंधन की आपसभी को हार्दिक बधाई व अनंत शुभकामनाएं!
यह पर्व आप सभी के जीवन में सौभाग्य लाए, समाज में सद्भाव, सौहार्द व सहयोग की भावना और अधिक सशक्त हो, प्रभु श्री राम से यही प्रार्थना है!
जय श्री राधे कृष्ण











