शिक्षा शेरनी का दूध हैं जो पियेगा वो ….
जिस बच्चे को कभी सर्कस वाले खरीदना चाहते थे, वही बच्चा आज 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर तिरंगा फहरा रहा था।
भावनगर के डॉ. गणेश बारैया की कहानी शायद इसीलिए इतनी खास है-कभी उनके कद को देखकर लोगों ने उनकी जिंदगी की कीमत लगाने की कोशिश की थी, लेकिन उनके पिता ने पैसे नहीं, बेटे का भविष्य चुना।
आज वही गणेश बारैया डॉक्टर हैं, लोगों की जिंदगी बचा रहे हैं और 15 अगस्त 2026 को भावनगर जिला होमगार्ड कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
यह वही गणेश हैं जिन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद NEET क्वालिफाई किया, MBBS पूरा किया और डॉक्टर बनने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
आज उनके हाथों में सम्मान था, सामने तिरंगा था और पीछे एक ऐसी कहानी थी जो हर उस इंसान को जवाब देती है जो किसी की क्षमता को उसके शरीर या कद से आंकता है।











