ब्रेकिंग//16 दिनों में 29 बार भूकंप, महाराष्ट्र में क्यों आ रहे इतने भूंकप; मुंबई पर भी खतरा

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महाराष्ट्र के नासिक और पालघर जिलों में पिछले दो हफ्तों में लगातार आ रहे छोटे-छोटे भूकंप के झटकों ने चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों ने लगातार हो रही इस भूगर्भीय गतिविधि को भूकंपों का झुंड (Earthquake Swarm) नाम दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच महाराष्ट्र में कम से कम 29 झटके दर्ज किए गए। इनमें से अकेले नासिक और उसके आसपास 24, पालघर में 4 और नागपुर में 1 झटका दर्ज किया गया। इन झटकों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 2.0 से 4.3 के बीच रही, जिनकी गहराई जमीन के नीचे 5 किमी से 8 किमी तक थी। सबसे बड़ा झटका 8 अगस्त को नासिक में दर्ज किया गया था, जिसकी तीव्रता 4.3 थी।

16 दिनों में 29 बार हिली धरती, महाराष्ट्र में क्यों आ रहे इतने भूंकप; मुंबई पर भी खतरा

नासिक और पालघर भारतीय मानक IS 1893 1 के तहत जोन-3 में आते हैं, जो मध्यम भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र को दर्शाता है। इससे पहले पालघर में सितंबर 2023 और फरवरी 2019 में भी इस तरह के स्वार्म देखे जा चुके हैं।

महाराष्ट्र में क्यों आ रहे हैं इतने भूंकप?
महाराष्ट्र के नासिक और पालघर जिलों में पिछले दो हफ्तों में लगातार आ रहे छोटे-छोटे भूकंप के झटकों ने चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों ने लगातार हो रही इस भूगर्भीय गतिविधि को भूकंपों का झुंड (Earthquake Swarm) नाम दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच महाराष्ट्र में कम से कम 29 झटके दर्ज किए गए। इनमें से अकेले नासिक और उसके आसपास 24, पालघर में 4 और नागपुर में 1 झटका दर्ज किया गया। इन झटकों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 2.0 से 4.3 के बीच रही, जिनकी गहराई जमीन के नीचे 5 किमी से 8 किमी तक थी। सबसे बड़ा झटका 8 अगस्त को नासिक में दर्ज किया गया था, जिसकी तीव्रता 4.3 थी।

क्या होता है भूकंपों का झुंड?
सामान्य भूकंपीय घटनाओं में एक बड़ा मुख्य भूकंप होता है और उसके बाद छोटे-छोटे झटके आते हैं। इसके विपरीत Earthquake Swarm एक सीमित क्षेत्र में कम समय के भीतर आने वाले छोटे-छोटे भूकंपों की एक श्रृंखला होती है, जिसमें कोई एक मुख्य या अत्यधिक तीव्र भूकंप नहीं होता। इन झटकों की गहराई आमतौर पर जमीन के नीचे केवल 3.5 किमी से 5 किमी के आसपास होती है। यह सिलसिला कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों तक भी जारी रह सकता है।