पीलिया क्यों होता है? जानिए 4 प्रमुख कारण
पीलिया यानी Jaundice तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन (Bilirubin) नामक पीले रंग का पदार्थ सामान्य से अधिक मात्रा में जमा होने लगता है। इसकी वजह से आँखों की सफेदी, त्वचा और कभी-कभी शरीर के अन्य हिस्सों में पीलेपन की झलक दिखाई दे सकती है।
पीलिया खुद हमेशा एक अलग बीमारी नहीं होता, बल्कि यह शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके पीछे लिवर, पित्त की नली, रक्त कोशिकाओं या अन्य कारण हो सकते हैं।
लिवर की समस्या
लिवर शरीर में बिलीरुबिन को प्रोसेस करने और उसे पित्त के माध्यम से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि लिवर में सूजन या किसी बीमारी के कारण उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो बिलीरुबिन शरीर में बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए हेपेटाइटिस जैसी स्थितियों में लिवर प्रभावित हो सकता है।
लिवर से जुड़ी समस्या होने पर पीलिया के साथ थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता या गहरे रंग का पेशाब जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
हालांकि, केवल आँखों या त्वचा के पीले होने से यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या लिवर में ही है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जाँच जरूरी होती है।
पित्त की नली में रुकावट
लिवर में बनने वाला पित्त पित्त की नलियों के रास्ते आंत तक पहुँचता है। यदि इस रास्ते में रुकावट पैदा हो जाए, तो बिलीरुबिन शरीर से सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकल पाता।
पित्त की पथरी पित्त की नली में रुकावट का एक संभावित कारण हो सकती है। इसके अलावा अन्य समस्याएँ भी पित्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं।
इस तरह की स्थिति में आँखों और त्वचा का पीला होना, पेशाब का गहरा रंग, मल का बहुत हल्का रंग, खुजली या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से जाँच कराना जरूरी है।
लाल रक्त कोशिकाओं का तेजी से टूटना
हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएँ सामान्य रूप से टूटती और नई बनती रहती हैं। जब किसी कारण से लाल रक्त कोशिकाएँ सामान्य से बहुत तेजी से टूटने लगती हैं, तो शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ सकती है।
इस प्रक्रिया को हीमोलाइसिस कहा जाता है।
कुछ रक्त संबंधी स्थितियाँ इस प्रक्रिया को बढ़ा सकती हैं। ऐसे मामलों में पीलिया के साथ कमजोरी, थकान या खून की कमी से जुड़े लक्षण भी हो सकते हैं।
इसलिए यदि पीलिया के साथ अत्यधिक कमजोरी या एनीमिया के लक्षण हों, तो डॉक्टर रक्त की जाँच कराने की सलाह दे सकते हैं।
नवजात शिशुओं में पीलिया
नवजात बच्चों में पीलिया काफी सामान्य हो सकता है। जन्म के बाद बच्चे का लिवर बिलीरुबिन को बाहर निकालने के लिए पूरी तरह परिपक्व होने में कुछ समय ले सकता है।
इस वजह से जन्म के शुरुआती दिनों में कुछ बच्चों की त्वचा या आँखें पीली दिखाई दे सकती हैं।
लेकिन नवजात शिशु में पीलिया को हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही देखना चाहिए, क्योंकि बहुत अधिक बिलीरुबिन गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
यदि बच्चे का पीलापन तेजी से बढ़ रहा हो, बच्चा दूध कम पी रहा हो, बहुत ज्यादा सुस्त हो या असामान्य व्यवहार कर रहा हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
पीलिया के सामान्य संकेत
पीलिया में सबसे प्रमुख संकेत आँखों की सफेदी या त्वचा का पीला होना है। इसके अलावा कुछ लोगों में:
- पेशाब का रंग गहरा होना
- मल का रंग बहुत हल्का होना
- त्वचा में खुजली
- थकान और कमजोरी
- भूख कम लगना
- मतली या उल्टी
- पेट में दर्द या असहजता
- बुखार, यदि संक्रमण मौजूद हो
जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हर व्यक्ति में सभी लक्षण मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है।
पीलिया में कौन-सी जाँच हो सकती है?
पीलिया का कारण जानने के लिए डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार कई तरह की जाँच कर सकते हैं।
इनमें बिलीरुबिन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, कम्प्लीट ब्लड काउंट और आवश्यकता के अनुसार अल्ट्रासाउंड या अन्य इमेजिंग टेस्ट शामिल हो सकते हैं।
कौन-सी जाँच जरूरी है, यह व्यक्ति के लक्षण और मेडिकल इतिहास पर निर्भर करता है।
सिर्फ त्वचा का रंग देखकर पीलिया का कारण तय करना सही नहीं है।
पीलिया में क्या सावधानी रखें?
यदि आपको पीलिया का संदेह है, तो सबसे पहले इसका कारण पता करना जरूरी है।
✔️ डॉक्टर की सलाह लें।
✔️ पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें, यदि आपके डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने को नहीं कहा है।
✔️ संतुलित और आसानी से पचने वाला भोजन लें।
✔️ शराब से बचें।
✔️ बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएँ या हर्बल/घरेलू उपचार न लें।
✔️ डॉक्टर द्वारा बताए गए टेस्ट और उपचार को पूरा करें।
किसी विशेष भोजन या घरेलू नुस्खे से पीलिया का हर कारण ठीक नहीं होता। उपचार हमेशा पीलिया के मूल कारण पर निर्भर करता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि आँखें या त्वचा तेजी से पीली हो रही हैं, पेशाब बहुत गहरा हो गया है, मल बहुत हल्का हो गया है, तेज़ पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेज़ बुखार, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या असामान्य नींद जैसी समस्या हो, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें।
विशेष रूप से नवजात बच्चे में पीलिया दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सबसे जरूरी बात
पीलिया को केवल “लिवर खराब होने” के बराबर समझना सही नहीं है। बिलीरुबिन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं—लिवर की समस्या, पित्त के प्रवाह में रुकावट, लाल रक्त कोशिकाओं का तेजी से टूटना और नवजात शिशुओं में सामान्य विकास संबंधी कारण।
इसलिए आँखें या त्वचा पीली दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जाँच कराना बेहतर है। सही कारण पता होने पर ही उचित उपचार किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण सूचना: यह जानकारी केवल स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। पीलिया का निदान केवल लक्षण देखकर नहीं किया जा सकता। लगातार पीलापन या गंभीर लक्षण होने पर हमारे डॉक्टर से परामर्श लें।
आरोग्य ज्ञान विकास











