हर समस्या अपने साथ समाधान का द्वार भी लेकर आती है, जब जीवन में कोई समस्या आती है, तो वह केवल एक प्रश्न लेकर नहीं आती, अपने भीतर उसका उत्तर भी छिपाए होती है। अंतर केवल इतना है कि घबराया हुआ मन समस्या को देखता है, जबकि शांत मन समाधान को। इसलिए परिस्थिति से नहीं डरना है पहले स्वयं को स्थिर करना, परमात्मा से शक्ति लेना और फिर पुरुषार्थ करना। जहाँ विश्वास, धैर्य और सही दिशा में उठाया गया एक कदम होता है, वहाँ बंद दिखाई देने वाले द्वार भी खुलने लगते हैं। याद रखना है, परमात्मा कभी ऐसी परीक्षा नहीं आने देते, जिसके साथ समाधान का मार्ग न हो
आज का भगवद चिन्तन
०५ अगस्त २०२६
__एक कटु सत्य
🕉️जीवन का प्रारम्भ स्वयं के रोने से होता है, और समाप्ति दूसरों के रोने से कभी सोचा कारण क्या है। नहीं न विचार कीजिये जब कोई बहेलिया किसी पक्षी को पकड़ता है, तो वह पक्षी बहुत तड़पता है, फड़फड़ाता है।
🕉️कारण वह दूसरे के बंधन में होता है।। और जब उस पक्षी को छोड़ दिया जाय तो बिना पीछे मुड़ के देखे आनंदित होकर आसमान में उड जाता है।
🕉️इसी तरह जीव एक स्वतंत्र सत्ता है, जब वह शरीर के बंधन में बंधता है।। तो वह दुखी होकर रोता है, और जब वह शरीर से मुक्त होता है तो आनंदित हो जाता है।जो रोते है।। वे केवल स्वार्थ और मोह वश।
जय श्री कृष्ण












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