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सद्चिन्तन

क्या आप कठिन समय में घबराकर परिणाम की चिंता करने लगते हैं? भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं — तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल (परिणाम) में कभी नहीं। इसलिए फल की चिंता में मत फँसो और कर्म न करने की

ओर भी मत जाओ।जब अर्जुन युद्धभूमि में अपने ही संबंधियों को देखकर विचलित हो गए और युद्ध करने से पीछे हटने लगे, तब भगवान ने उन्हें कर्म, धर्म और कर्तव्य का ज्ञान दिया, कि व्यक्ति को अपना कर्तव्य ईमानदारी से

करना चाहिए, लेकिन परिणाम को लेकर अत्यधिक चिंता नहीं करनी चाहिए।जीवन की सीख:-हम अक्सर किसी काम की शुरुआत से पहले ही उसके परिणाम को लेकर डरने लगते हैं — अगर असफल हो गए तो?

लेकिन गीता सिखाती है कि यदि कर्म सही नीयत और पूरी मेहनत से किया जाए, तो चिंता कम और आत्मविश्वास अधिक होता है।“जब आप कर्म पर ध्यान देते हैं, तो डर कम होने लगता है और सफलता का मार्ग खुद बनने लगता है।”

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