संत की पहचान – जो ईश्वर का दर्शन करवाए–साधवी सुनीता भारती
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा गीता ज्ञान यज्ञ का समापन
देवघर । प्रबेस गुप्ता (दर्शन समीक्षा)
स्थानीय प्रणय वाटिका में श्री राम चरितमानस एवं गीता ज्ञान के अंतिम दिवस सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुनीता भारती जी ने कहा कि एक सच्चे संत का वास्तविक पहचान केवल प्रवचन या ग्रंथों का पाठ ही नहीं है। सच्चे संत की पहचान यह है कि वह केवल ईश्वर की बातें ही नहीं करता, बल्कि जीव को ईश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन करवाने का सामर्थ्य रखता है।
शास्त्रों में कहा गया है —
“

संत ईश्वर समान जानि, करु प्रणाम कर जोर।१
संत मुख दर्शन करि, मिटे जन्म के कोर॥”
संत वह है जो अंधकारमय अज्ञान जीवन में ज्ञान का दीप प्रज्वलित कर दे। जिस गुरु या संत के द्वारा हमें आत्मा और परमात्मा का साक्षात अनुभव हो जाए, वही सद्गुरु कहलाता है।
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय”॥
कबीर जी के इस दोहे में स्पष्ट है कि गुरु वही सच्चा संत है जो गोविंद (ईश्वर) का साक्षात कराए। उसका उपदेश केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता, वह अनुभव बन जाता है।
इसलिए सच्चे संत की पहचान यही है कि
वह ब्रह्मज्ञान का प्रदाता होता है।
वह जीव को ईश्वर का परिचय देता है।
वह मनुष्य को ईश्वर से जोड़ देता है, केवल कर्मकांड में नहीं उलझाता।
उसकी संगति से जीवन में शांति, आनंद और दिशा मिलती है।
संत वही सच्चा है जो केवल भगवान की बातें न करे, बल्कि भगवान का साक्षात दर्शन कराए — जो ज्ञान देकर ईश्वर से मिलन करवाए, वही संत की सच्ची पहचान है। आज मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी मेयर साहिबा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य आयोजक अजय झा (बोकारो स्टील प्लांट), अमर प्रताप सिंह(राँची), एवं समाज के गणमान्य लोग तथा दिव्य ज्योति परिवार (देवघर)का योगदान है। यह जानकारी समाज सेवी श्री प्रभाष गुप्ता ने दी।












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