इंसान ने प्रागैतिहासिक काल (प्रारंभिक मानव सभ्यता) से ही प्रकृति की शक्तियों से भय और आश्चर्य के कारण भगवान या अज्ञात शक्ति को मानना शुरू किया था।
कारण और शुरुआत
प्रकृति का भय: आदिमानव ने जब आंधी, तूफान, बिजली कड़कना, और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को देखा, तो उसने इन्हें किसी अलौकिक शक्ति का चमत्कार माना।
अज्ञात का रहस्य: जीवन, मृत्यु, सूर्योदय और वर्षा के रहस्यों को न समझ पाने के कारण इंसान ने एक ऐसी सर्वोच्च शक्ति की कल्पना की जो इन सबको चलाती है।
कृतज्ञता: भोजन, पानी और जीवन देने वाली प्रकृति (जैसे सूर्य, अग्नि, नदियाँ) के प्रति आभार प्रकट करने के लिए उनकी पूजा की जाने लगी।
जीवन की शुरुआत: विज्ञान के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत लगभग 3.5 अरब साल पहले पानी के भीतर सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) के रूप में हुई थी।
मानव का उद्भव: लंबी विकासवादी प्रक्रिया (Evolution) के बाद, आधुनिक मानव यानी ‘होमो सेपियन्स’ (Homo sapiens) का धरती पर उद्भव लगभग 3 लाख वर्ष पहले हुआ।
भगवान की अवधारणा: विज्ञान यह मानता है कि पहले इंसान और समाज आए। उसके बाद इंसानों की जिज्ञासा, डर और कल्पना ने भगवान और धर्म की अवधारणा को जन्म दिया।
धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण
सनातन (हिंदू) धर्म: हिंदू ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, परम शक्ति या ब्रह्मा जी ने इस ब्रह्मांड की रचना की। काल गणना के अनुसार सृष्टि चक्र में पहले देवताओं/ब्रह्मा जी का अस्तित्व माना गया है, और पहले पुरुष के रूप में स्वयंभू मनु व पहली स्त्री शतप रूपा से मानव वंश चला।
अन्य धर्म: ईसाई, यहूदी और इस्लाम धर्म के अनुसार, ईश्वर या अल्लाह ने पहले आदम (और हव्वा) जैसे इंसानों को बनाया, यानी ईश्वर को रचनाकार और प्रथम माना गया है।











