फ्रेंच-पोलिश भौतिक विज्ञानी और रसायन विज्ञानी मैरी क्यूरी को दुनिया आज भी उनके आविष्कार की वजह से जानती है।
7 नवंबर, 1867 में जन्मीं मैरी ने रेडियम और पोलोनियम तत्वों की खोज की थी। इसके साथ ही उन्होंने रेडियोधर्मिता का सिद्धांत ( थ्योरी ऑफ रेडियोएक्टिविटी) भी दिया था। वो नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला थीं। इसके साथ ही वो पहली ऐसी शख्स थीं, जिन्होंने दो नोबेल पुरस्कार जीते थे।”
पहला नोबेल उन्हें फिजिक्स में संयुक्त रूप से अपने पति और हेनरी बेक्वेरेल के साथ मिला था। वहीं, दूसरा नोबेल उन्हें केमेस्ट्री में मिला था। जिस रेडियम और पोलोनियम की खोज के लिए उन्हें जाना जाता है, वहीं उनकी मौत का कारण भी बना था। रेडिएशन के संपर्क में आने के चलते मैरी अपलास्टिक एनीमिया की शिकार हो गईं थी, जिसके चलते 4 जुलाई, 1934 को उनकी मौत हो गई थी।
मैरी ने अपने ज्यादातर कार्य बिना किसी सुरक्षा उपाय के किए थे। वो रेडियोएक्टिव आइसोटोप वाले टेस्ट ट्यूब अपनी जेब और डेस्क में रखा करती थीं। इनसे होने वाले रेडिएशन का असर ही उनकी मौत का कारण बना। हालांकि, मैरी अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं, जिनकी अपनी खोज उनकी मौत की वजह बनी। ऐसे आविष्कारकों की लिस्ट काफी लंबी है।
लगातार खतरनाक विकिरणों के संपर्क में रहने के कारण उनकी अस्थि मज्जा (Bone Marrow) स्वस्थ लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करना बंद कर चुकी थी, जिससे वह इस गंभीर बीमारी की शिकार हो गईं।
निधन: 4 जुलाई 1934 को फ्रांस के सैंसलेमोज़ सेनेटोरियम में 66 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रयोगशाला की नोटबुक और सामान आज भी रेडियोधर्मी बने हुए हैं।











