शांति पाने के लिए दुनिया को नहीं, अपने मन को बदलना पड़ता है -बलभद्र पांडे नईदिल्ली

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ज्ञान वो मोती है जिसे प्राप्त तो सभी करना चाहते हैं लेकिन प्राप्त वही लोग कर पाते है जो गहराई तक जाने का साहस और साधना के साथ आगे बढ़ते रहते हैं।
उत्तेजना और क्रोध में तत्काल कहा गया शब्द और किया गया कर्म स्थिति को अत्यधिक बिगाड़ सकता है। इसलिए मौन और मुस्कुराहट से अपना श्रृंगार करें। परिस्थिति सामान्य हो जाएगी संसार का चक्र मुस्कुराकर हर क्षण को स्वीकार करें।

तनाव का सबसे बड़ा कारण परिस्थितियों को अपनी इच्छा के अनुसार चलाने का प्रयास है। जीवन में कुछ बातें परमात्मा के ऊपर छोड़ देना ही समझदारी है । जय सीता राम
शांति पाने के लिए दुनिया को नहीं, अपने मन को बदलना पड़ता है। इच्छाएं, तृष्णा जितनी बढ़ती है, उतना ही मन भटकता है। जो कम से खुश रहना सीख लेते हैं उन्हें ज्यादा की इच्छा, तृष्णा की लालसा नहीं होती , वो ही सच्चा सुख पाते हैं।
स्पष्ट शब्द भले ही पल भर के लिए बुरे लगें,
पर झूठे वादे जीवन भर की निराशा दे जाते हैं ।

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