मध्य प्रदेश के आदिवासी परिवार में जन्मीं सविता प्रधान की कहानी कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने का जज्बा सिखाती है। बचपन में पढ़ाई के लिए संघर्ष, कम उम्र में शादी और फिर घरेलू हिंसा का शिकार होने के बावजूद न सिर्फ उन्होंने खुद को संभाला, बल्कि UPSC CSE एग्जाम क्रैक कर IAS अधिकारी पद तक पहुंची।
मैं मरने जा रही थी। बेटे को सुलाया। आखिरी बार उसका माथा चूमा और फांसी लगाने के लिए स्टूल पर चढ़ गई। साड़ी को पंखें से लटकाकर गले में डाल लिया था…’
IAS सविता प्रधाना की कहानी रोंगटे खड़ी कर देती है। ससुराल में नरक जैसी जिंदगी से बेहतर उन्होंने मरने सही समझा था। लेकिन उन दो-तीन सेकंड (जो उनकी जिंदगी के आखिरी सेकंड होने वाले थे।) में न सिर्फ उन्होंने खुद को संभाला, बल्कि खुद एक नई जिंदगी और राह तैयार की। आईएएस सविता प्रधान की सक्सेस स्टोरी विपरीत हालातों से लड़ना सिखाती हैsource:NBT












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